दिवाली की रौनक तो है, लेकिन कहां खो गए मिट्टी के घरौंदे और कंदील? बदलते समय के साथ छूट रही हैं ये परंपराएं

दिवाली की तैयारियां अब पहले जैसी नहीं रहीं। कभी बच्चे मिट्टी के घरौंदे बनाते थे, घरों में कंदील तैयार होते थे और मिठाइयां पड़ोसियों में बांटी जाती थीं। बदलते समय के साथ त्योहार से जुड़ी कई पुरानी परंपराएं भी पीछे छूट रही हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 30 October 2026, 12:29 PM IST
1 / 7 दिवाली आते ही घरों में रोशनी, बाजारों में सजावट और मिठाइयों की खुशबू फैल जाती है। पहले इस त्योहार की तैयारियां कई दिन पहले शुरू हो जाती थीं। बच्चे मिट्टी के घरौंदे बनाते थे, घरों में कागज के कंदील तैयार होते थे और महिलाएं अपने हाथों से पकवान बनाकर पड़ोसियों में बांटती थीं। आज त्योहार मनाने का तरीका काफी बदल गया है। बाजार की चमक और ऑनलाइन खरीदारी के बीच कई छोटी-छोटी परंपराएं कुछ इलाकों और परिवारों में कम होती दिखाई दे रही हैं।
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Location :  New Delhi

Published :  30 October 2026, 12:29 PM IST