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क्या सच में खत्म हो रही हैं ये परंपराएं? ऐसा नहीं है कि ये सभी परंपराएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। देश के कई गांवों और शहरों में आज भी लोग घरौंदे बनाते हैं, मिट्टी के दीये जलाते हैं और पारंपरिक तरीके से पूजा करते हैं। लेकिन बदलती जीवनशैली, शहरीकरण, समय की कमी और बाजार में आसानी से मिलने वाले तैयार सामान ने त्योहार मनाने के तरीकों को जरूर बदला है। दिवाली का असली उत्साह सिर्फ महंगी लाइटों और सजावट में नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी खुशियों में भी है, जिन्हें परिवार मिलकर तैयार करता था। अगर नई पीढ़ी को इन परंपराओं से जोड़ा जाए, तो मिट्टी के घरौंदे, हाथों से बने कंदील और घर के पकवान केवल पुरानी यादें बनकर नहीं रहेंगे।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 30 October 2026, 12:09 PM IST
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Published :  30 October 2026, 12:09 PM IST

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