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दिवाली पर घरौंदे बनाने की परंपरा खासतौर पर बिहार और पूर्वांचल के कई इलाकों में देखने को मिलती रही है। बच्चे और परिवार के सदस्य मिट्टी से छोटे-छोटे घर बनाते थे। उन्हें रंगों, फूलों, दीयों और दूसरी सजावटी चीजों से सजाया जाता था। घरौंदों के साथ मिट्टी के छोटे बर्तन यानी कुलिया-चुकिया भी रखे जाते थे। यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि बच्चों के लिए त्योहार से जुड़ने का एक रचनात्मक तरीका था। अब तैयार सजावटी सामान और सीमित जगह वाले घरों के कारण कई परिवारों में यह परंपरा पहले जैसी नजर नहीं आती।
Published : 30 October 2026, 12:06 PM IST