धराली त्रासदी की पहली बरसी: अपनों को खोने का दर्द सीने में दबाए, अब आत्मनिर्भरता से आगे बढ़ रहे हैं ग्रामीण

धराली में आई भीषण आपदा के बाद प्रभावित लोग अब धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं। पुनर्वास प्रक्रिया के बीच ग्रामीणों ने सेब बागवानी और ट्रैकिंग को आजीविका का जरिया बनाया है। जानिए आपदा के बाद की नई सुबह की पूरी कहानी

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 August 2026, 1:22 PM IST
1 / 5 धराली में आई विनाशकारी आपदा को लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं। इस त्रासदी में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया, जिनकी आखिरी झलक पाने की आस आज भी अधूरी है। बेघर हुए करीब तीस परिवार रिश्तेदारों और किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। सिर से छत छीनने के साथ-साथ लोगों का रोजगार भी पूरी तरह चौपट हो गया था। (Img- X)
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Location :  Uttarkashi

Published :  5 August 2026, 1:22 PM IST