धराली त्रासदी की पहली बरसी: अपनों को खोने का दर्द सीने में दबाए, अब आत्मनिर्भरता से आगे बढ़ रहे हैं ग्रामीण
धराली में आई भीषण आपदा के बाद प्रभावित लोग अब धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं। पुनर्वास प्रक्रिया के बीच ग्रामीणों ने सेब बागवानी और ट्रैकिंग को आजीविका का जरिया बनाया है। जानिए आपदा के बाद की नई सुबह की पूरी कहानी
धराली में आई विनाशकारी आपदा को लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं। इस त्रासदी में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया, जिनकी आखिरी झलक पाने की आस आज भी अधूरी है। बेघर हुए करीब तीस परिवार रिश्तेदारों और किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। सिर से छत छीनने के साथ-साथ लोगों का रोजगार भी पूरी तरह चौपट हो गया था। (Img- X)
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त्रासदी के बाद प्रभावितों को दोबारा बसाने के लिए प्रशासन की ओर से कोशिशें तेज कर दी गई हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 21 परिवारों के पुनर्वास हेतु भू-वैज्ञानिक सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा 66 अन्य लोगों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि 25 अतिरिक्त परिवारों के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई जल्द ही शुरू होने वाली है ताकि उन्हें सुरक्षित ठिकाना मिले। (Img- X)
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आपदा के बाद ग्रामीणों का मानना है कि खतरे को देखते हुए नदी किनारे दोबारा बड़े होटल या व्यावसायिक निर्माण शुरू करना जोखिम भरा है। ऐसे में खीर गंगा से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने पर ग्रामीण नदी के दोनों छोरों पर खेती करने की योजना बना रहे हैं। धराली के लोग अब अपनी आजीविका को मजबूती देने के लिए सेब बागवानी और नगदी फसलों पर आत्मनिर्भर हो रहे हैं। (Img- X)
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आपदा के बाद गांव की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए युवाओं ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली है। विशेष रूप से गांव की युवतियों ने विपरीत परिस्थितियों में परिवार का सहारा बनने के लिए ट्रैकिंग व्यवसाय को अपनाया है। जिन लोगों के छोटे होटल व दुकानें किसी तरह बच गई थीं, वे भी उन्हें दोबारा स्थापित कर गांव की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। (Img- X)
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धराली के आपदा प्रभावित लोग सीने में गहरे जख्म और अपनों को खोने की पीड़ा समेटे हुए आगे बढ़ने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर ग्रामीण अब मलबे से निकलकर नए भविष्य की नींव रख रहे हैं। त्रासदी का सामना करने के बावजूद धराली के निवासियों का यह जीवटता भरा रुख पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन चुका है। (Img- X)
धराली में आई विनाशकारी आपदा को लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं। इस त्रासदी में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया, जिनकी आखिरी झलक पाने की आस आज भी अधूरी है। बेघर हुए करीब तीस परिवार रिश्तेदारों और किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। सिर से छत छीनने के साथ-साथ लोगों का रोजगार भी पूरी तरह चौपट हो गया था। (Img- X)
त्रासदी के बाद प्रभावितों को दोबारा बसाने के लिए प्रशासन की ओर से कोशिशें तेज कर दी गई हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 21 परिवारों के पुनर्वास हेतु भू-वैज्ञानिक सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा 66 अन्य लोगों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि 25 अतिरिक्त परिवारों के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई जल्द ही शुरू होने वाली है ताकि उन्हें सुरक्षित ठिकाना मिले। (Img- X)
आपदा के बाद ग्रामीणों का मानना है कि खतरे को देखते हुए नदी किनारे दोबारा बड़े होटल या व्यावसायिक निर्माण शुरू करना जोखिम भरा है। ऐसे में खीर गंगा से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने पर ग्रामीण नदी के दोनों छोरों पर खेती करने की योजना बना रहे हैं। धराली के लोग अब अपनी आजीविका को मजबूती देने के लिए सेब बागवानी और नगदी फसलों पर आत्मनिर्भर हो रहे हैं। (Img- X)
आपदा के बाद गांव की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए युवाओं ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली है। विशेष रूप से गांव की युवतियों ने विपरीत परिस्थितियों में परिवार का सहारा बनने के लिए ट्रैकिंग व्यवसाय को अपनाया है। जिन लोगों के छोटे होटल व दुकानें किसी तरह बच गई थीं, वे भी उन्हें दोबारा स्थापित कर गांव की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। (Img- X)
धराली के आपदा प्रभावित लोग सीने में गहरे जख्म और अपनों को खोने की पीड़ा समेटे हुए आगे बढ़ने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर ग्रामीण अब मलबे से निकलकर नए भविष्य की नींव रख रहे हैं। त्रासदी का सामना करने के बावजूद धराली के निवासियों का यह जीवटता भरा रुख पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन चुका है। (Img- X)