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शत्रुओं पर विजय पाने और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए यह पाठ अचूक माना जाता है। कुंडली में मौजूद मंगल, शनि, राहु या केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने में भी यह कारगर है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से पीड़ित लोगों को इसके पाठ से तुरंत राहत मिलती है और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है। (Img- Pinterest)
Published : 27 June 2026, 2:01 PM IST