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बस्ती जिले के एक प्रमुख मोहल्ले में 10 घंटे तक बिजली गुल रही। जनता की गुहार अनसुनी रही, फोन कॉल्स उठे नहीं। जब वरिष्ठ अधिकारी से बात हुई, तो उनका रवैया और भाषा चौंकाने वाली थी। अब वायरल हुई इस ऑडियो क्लिप ने विभागीय संवेदनहीनता की परतें उधेड़ दी हैं। परिणामों की चेतावनी भी आ चुकी है।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा
Basti, Uttar Pradesh: राज्य के एक वरिष्ठ व कई बार सांसद रह चुके राजनेता और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्थानीय बिजली विभाग की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने अपने क्षेत्र के एक पढ़े-लिखे नागरिक और बस्ती जिले के अधीक्षण अभियंता के बीच हुई फोन पर बातचीत को आधार बनाकर कहा कि बिजली विभाग की संवेदनहीनता अब जन-आक्रोश का कारण बन चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, शनिवार को बस्ती शहर के एक प्रमुख मोहल्ले में सुबह 10 बजे से बिजली आपूर्ति ठप रही। स्थानीय लोगों ने दिनभर संबंधित विभागीय अधिकारियों को बार-बार फोन किया, लेकिन किसी ने कॉल उठाने की जहमत तक नहीं उठाई। अंत में जब मजबूरी में अधीक्षण अभियंता को कॉल किया गया, तो उनके जवाब और रवैये ने आग में घी का काम किया।
वरिष्ठ नेता को भेजे गए व्हाट्सएप संदेश में नागरिक ने इस संवाद का ऑडियो भी भेजा है, जिसमें अधिकारी का व्यंग्यात्मक और उपेक्षापूर्ण लहजा साफ सुना जा सकता है। यह क्लिप अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा: “मैंने तीन दिन पहले ही UPPCL के चेयरमैन, MD और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से इस मुद्दे पर गंभीर वार्ता की थी। मैंने साफ कहा था कि तकनीकी व्यवस्थाएं जैसे 1912 केवल पूरक हो सकती हैं, विकल्प नहीं। लेकिन आज की यह ऑडियो क्लिप साबित करती है कि उन्हें जनता की नहीं, सिर्फ औपचारिकता की परवाह है।”
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी मीटिंग्स में बार-बार यह झूठ बोलते रहे कि 1912 पर ही शिकायत दर्ज कराने के निर्देश नहीं दिए गए हैं। राजनेता ने कहा, “मैंने खुद कई बार यह पूछा, लेकिन हर बार एक ही असत्य बयान दिया गया। अब जब यह ऑडियो सामने आया है, तो यह ज़ाहिर हो गया है कि कुछ अधिकारी सरकार की छवि जानबूझ कर खराब करने में लगे हैं।”
उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जन समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं हुआ, और यदि आमजन के प्रति भाषा और व्यवहार में सुधार नहीं आया, तो परिणाम “भयंकर” होंगे। बस्ती की यह घटना उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करती है। जब तकनीक और मानवता का तालमेल नहीं हो पाता, तो सबसे ज़्यादा नुकसान आम नागरिक को उठाना पड़ता है।
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