रूस से व्यापार बंद करो या झेलो 100% टैरिफ! भारत-चीन-ब्राजील पर नाटो की आर्थिक घेराबंदी की चेतावनी

जब हथियारों से जंग न रुके, तो टैरिफ को बना दो मिसाइल। यही रणनीति अब अमेरिका और नाटो ने अपनाई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर वैश्विक व्यापार पर टैरिफ बम गिरा रहे हैं, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध को थामने के लिए भी अब आर्थिक मोर्चे पर घेराबंदी शुरू हो गई है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 16 July 2025, 8:51 PM IST

New Delhi:  जब हथियारों से जंग न रुके, तो टैरिफ को बना दो मिसाइल। यही रणनीति अब अमेरिका और नाटो ने अपनाई है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर वैश्विक व्यापार पर टैरिफ बम गिरा रहे हैं, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध को थामने के लिए भी अब आर्थिक मोर्चे पर घेराबंदी शुरू हो गई है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक,   हालिया घटनाक्रम में नाटो महासचिव मार्क रूट ने अमेरिका के सीनेटरों के साथ बैठक में एक कठोर चेतावनी दी है—रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों को 100% टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से भारत, चीन और ब्राजील को निशाने पर लिया गया है।

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मार्क रूट का बयान सीधा है, "अगर रूस यूक्रेन में युद्ध रोकने की दिशा में नहीं बढ़ता, तो हम उसे आर्थिक रूप से अलग-थलग कर देंगे। और जो देश उसके साथ व्यापार करते हैं, उन्हें भी इसका दाम चुकाना होगा।" इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो अभी भी रूस से कच्चा तेल, गैस और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का आयात कर रहे हैं—और इसमें भारत, चीन और ब्राजील प्रमुख हैं।

भारत और चीन पर सीधा दबाव

नाटो महासचिव का इशारा साफ है। नई दिल्ली और बीजिंग को अब तटस्थता की नीति छोड़नी होगी। उन्हें रूस को युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव डालना चाहिए—अन्यथा उन्हें अपनी आर्थिक नीतियों की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। भारत-रूस संबंध ऐतिहासिक रूप से रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक मामलों में गहरे रहे हैं। इसी तरह चीन, रूस का एक अहम व्यापारिक भागीदार है। लेकिन अब इस साझेदारी की वैश्विक कीमत तय करने का समय आ चुका है।

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ट्रंप का दबाव, नाटो की चेतावनी और पुतिन का पलटवार—इन सबके बीच वैश्विक व्यापार दो खेमों में बंटता दिख रहा है:

एक ओर अमेरिका, नाटो और पश्चिमी देश

दूसरी ओर रूस और उसके 'अप्रत्यक्ष समर्थक': भारत, चीन, ब्राजील

यह स्थिति विश्व व्यापार संगठन (WTO) और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

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भारत अब एक त्रिकोणीय दबाव में है:

अमेरिका और नाटो के दबाव से बचना

रूस से रणनीतिक रिश्ते बनाए रखना

और अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना

भारत को अब यह तय करना होगा कि वह कितनी स्वतंत्रता के साथ वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति बनाए रख सकता है—खासकर तब जब व्यापारिक फैसलों पर भू-राजनीति का असर बढ़ता जा रहा है।

 

Location :  New Delhi

Published :  16 July 2025, 8:51 PM IST