पहली गणतंत्र परेड के दौरान भारतीय राष्ट्रपति को 6 घोड़ों की बग्गी में लाया गया था। वहीं कार्यक्रम में मुख्य अतिथी के रुप में इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णों पहुंचे थे। देश की जनता में भी भारत के पहले गणतंत्र दिवस को लेकर काफी उत्साह था। जिसके चलते 15000 हजार से भी ज्यादा लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर

26 जनवरी को ही क्यों लागू हुआ संविधान
New Delhi: दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में संविधान के 76 साल पूरे होने जा रहे हैं, जिसके चलते पूरे भारत में जश्न की तैयारियां चल रही है। देश की राजधानी नई दिल्ली में हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर भव्य परेड निकाली जाती है। जिसकी अगुवाई हमारे राष्ट्रपति करते हैं। वहीं इस दिन तीनों सेना के सर्वोच्च कमांडर सलामी भी देते हैं। क्या आपको पता है.. जिस संविधान दिवस को लेकर हम जश्न मना रहे है..उसे बनाने में कितना समय लगा था..वहीं इसको तैयार करने में कितने लोगों की भूमिका थी। 26 जनवरी को ही इसे लागू करने के पीछे क्या कोई विशेष आशय तो नहीं था..और पहले गणतंत्र दिवस के समय किस तरह का आयोजन किया गया था..तो आईए जानते हैं भारत के संविधान के निर्माण शुरु होने से लेकर लागू होने तक की दास्तां..
संविधान के मसौदे की तैयारी
संविधान के प्रारंभिक प्रारुप या यूं कहें अस्थायी फार्मेट को संविधान सलाहकार बीएन राव के द्वारा तैयार किया गया था..जिसके बाद उस पर विचार करके अंतिम रुप देने के लिए एक स्थायी समिती बनाई गई थी..इस समिती का नेतृत्व भारत के पहले कानून मंत्री डा भीमराव अंबेडकर ने किया था..वहीं समिती में कुल सात सदस्य थे..जिन्होंने संविधान तैयार करने को लेकर गहन विचार विमर्श किया..भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे..जिनकी देखरेख में इस प्रकिया को पूरा किया गया..
26 जनवरी को ही क्यों लागू हुआ गणतंत्र
स्वतंत्रता के बाद भी भारत में कुछ साल तक ब्रिटिश संविधान के अधीन ही देश चलता रहा..और फिर साल 1950 की 26 जनवरी को भारत का खुद गणतंत्र लागू हुआ, जिसके बाद देश को ब्रिटिश कानून से मुक्त करके सही मायने में आजादी मिली..वैसे संविधान को बनाने की तैयारी देश की आजादी से पहले 9 दिसंबर 1946 से ही कर दी गई थी..लेकिन भारत की विविधता और आजादी के बाद के तनाव को देखते हुए इस को तैयार करने में बहुत सावधानी बरती गई..ताकि इसके निर्माण में किसी भी तरह की कोई चूक न हो जाए..जिसके चलते ही इसे अंतिम रुप देने में 2 साल 11 महीने 18 दिन लग गए..वहीं भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को आधिकारिक रुप दे दिया गया था.. लेकिन इसे लागू 26 जनवरी 1950 को किया गया..आपको बता दें कि देश की आजादी से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 26 जनवरी को ही ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल बजाते हुए पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की थी..कांग्रेस इस दिन को देश के लिए खास मानती थी, जिसके चलते संविधान को लागू करने के लिए इस दिन को ही चुना गया..और इस तरह भारत में 26 जनवरी 1950 को स्वदेशी संविधान लागू किया गया..और इसके अधीन देश के सभी राजकीय और प्रशासनिक काम-काज करने की शुरुआत की..
कैसे मनाया गया देश का पहला गणतंत्र महोत्सव
भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस आज से 76 साल पहले मनाया था। तब देश के प्रथम राष्ट्रपति डा राजेंद्र प्रसाद ने संविधान को स्वीकृति देते हुए मोहर लगाई थी। इस दिन स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवती राज गोपालाचारी ने भारत को संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था। और फिर भारत के पहले राष्ट्रपति के रुप में डा राजेंद्र प्रसाद ने शपथ ली। वहीं इस दौरान उन्हें भारतीय जवानों की तरफ से 31 तोपों की सलामी दी गई थी। गणतंत्र दिवस की पहली परेड कर्तव्य पथ पर न होकर इरविन एम्फीथिएटर में की गई थी। जिसमें 3000 जवानों ने हिस्सा लिया था..वहीं 100 के करीब सैन्य विमानों ने भी हिस्सा लिया था।
Republic Day 2026: OTT का देशभक्ति डोज़, इस रिपब्लिक डे जरूर देखें ये फिल्में
पहली गणतंत्र परेड के दौरान भारतीय राष्ट्रपति को 6 घोड़ों की बग्गी में लाया गया था। वहीं कार्यक्रम में मुख्य अतिथी के रुप में इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णों पहुंचे थे। देश की जनता में भी भारत के पहले गणतंत्र दिवस को लेकर काफी उत्साह था। जिसके चलते 15000 हजार से भी ज्यादा लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे थे। भारत की पहली गणतंत्र परेड बेशक सादगी भरी थी, लेकिन उसकी अहमियत इतनी थी कि शायद ही उसे शब्दों में परिभाषित किया जा सके..देश के जवान से लेकर हर इंसान के लिए ये वो भावुकता के क्षण थे। जिसे देखने के लिए कई पीढ़ियां न्यौछावार हो गई।और सौभाग्य से उन्हें ये दिन देखने को मिला था। भारत के पहले गणतंत्र दिवस उत्सव में बेशक चकाचौंध कम रही हो..लेकिन जोश बहुत हाई था..क्या बच्चा..क्या जवान..क्या बूढ़ा देश का सभी वर्ग इस उत्सव की खुमारी में डूबा हुआ था और जश्न मना रहा था।