
यह मामला बुरहानपुर जिला मुख्यालय की महाजन कॉलोनी का है। यहां रहने वाली बिंदुबाई के पति दयाशंकर करीब 9 साल पहले पैरालिसिस के शिकार हो गए थे। बीमारी ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। इलाज के दौरान डॉक्टरों को उनका एक पैर भी काटना पड़ा। इसके बाद से दयाशंकर चलने-फिरने में असमर्थ हो गए और उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। पति की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी बिंदुबाई पर है। वह लंबे समय से पति की जरूरतों को पूरा करने के साथ उनके लिए सरकारी सहायता पाने की कोशिश कर रही हैं।
बिंदुबाई के मुताबिक, वह अपने दिव्यांग पति के लिए ट्राईसाइकिल और पेंशन की मांग को लेकर कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा चुकी हैं। उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी योजनाओं के तहत पति को जरूरी सुविधाएं मिल जाएंगी, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। बताया गया कि बिंदुबाई शुक्रवार को भी अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं, लेकिन उस दिन संबंधित अधिकारी नहीं मिल सके। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को एक बार फिर जनसुनवाई में जाने का फैसला किया।
इस बार बिंदुबाई खाली हाथ नहीं, बल्कि अपने दिव्यांग पति दयाशंकर को पीठ पर लादकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने कलेक्टर विवेक कुमार के सामने अपनी परेशानी रखी और पति के लिए ट्राईसाइकिल तथा पेंशन दिलाने की मांग की। जनसुनवाई में पति को पीठ पर उठाकर पहुंची महिला की तस्वीर और वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। बिंदुबाई का यह कदम उनकी मजबूरी और पति की देखभाल के लिए किए जा रहे संघर्ष को सामने लाता है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिव्यांग व्यक्ति के लिए ट्राईसाइकिल और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं उसके जीवन को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद एक परिवार को इन सुविधाओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अब देखना होगा कि जनसुनवाई में बिंदुबाई की शिकायत के बाद प्रशासन उनके दिव्यांग पति को ट्राईसाइकिल और पेंशन दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, इस घटना ने दिव्यांगों और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Location : Burhanpur
Published : 1 November 2026, 12:56 PM IST