बीजेपी ने ओडिशा से राज्यसभा उम्मीदवारों के रूप में मनमोहन सामल और सुजीत कुमार की घोषणा की। दोनों नेताओं के अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से पार्टी को चुनाव में मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सुजीत कुमार और मनमोहन सामल (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Bhubaneswar: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ओडिशा से राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता मनमोहन सामल और पूर्व सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला बीजेपी की केंद्रीय समिति की बैठक में लिया गया और इसे आगामी राज्यसभा चुनाव के लिहाज से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि दोनों नेताओं का अनुभव और संगठनात्मक क्षमता चुनाव में पार्टी को मजबूती देगी।
राज्यसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने ओडिशा में मजबूत और अनुभवी चेहरों पर दांव खेला है। पार्टी का मानना है कि संगठन और संसदीय अनुभव वाले नेताओं को आगे बढ़ाने से चुनावी समीकरण बेहतर होंगे। केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे न केवल पार्टी की विचारधारा को प्रभावी ढंग से सदन में रखेंगे, बल्कि राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों को भी मजबूती से उठाएंगे।
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सुजीत कुमार ओडिशा के एक शिक्षित और अनुभवी राजनेता हैं। उनका जन्म 17 नवंबर 1975 को ओडिशा के भवानीपटना में हुआ था। वे पेशे से वकील हैं और सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए Harvard University और University of Oxford जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन किया है।
सुजीत कुमार पहले बीजू जनता दल के सदस्य थे और उसी पार्टी से राज्यसभा सांसद भी रहे। हाल ही में उन्होंने बीजेडी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा। राजनीतिक और कानूनी मामलों में उनकी गहरी समझ मानी जाती है। नीति-निर्माण, सामाजिक न्याय और विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है। पार्टी का मानना है कि उनका अनुभव राज्यसभा में उपयोगी साबित होगा।
मनमोहन सामल ओडिशा की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म 15 अप्रैल 1959 को भद्रक, ओडिशा में हुआ था। वे वर्तमान में बीजेपी की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष हैं और इससे पहले भी कई बार इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सामल ने संगठन में लंबा सफर तय किया है।
वे पहले राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और ओडिशा विधानसभा के सदस्य तथा मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। मंत्री रहते हुए उन्होंने राजस्व, खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी निभाई। संगठनात्मक क्षमता और जमीनी पकड़ के कारण उन्हें पार्टी का मजबूत स्तंभ माना जाता है।
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केंद्रीय नेतृत्व की घोषणा के बाद अब ओडिशा में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। पार्टी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय हो गए हैं और चुनावी रणनीति को धार देने की तैयारी में जुट गए हैं। बीजेपी का यह कदम अन्य दलों के लिए भी रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण और स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने का संकेत दे दिया है।