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पश्चिम एशिया संकट के बीच हुई ऑल पार्टी मीटिंग में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान चर्चा में है। पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल उठने पर उन्होंने साफ कहा कि भारत ‘दलाल देश’ की भूमिका नहीं निभाएगा। बैठक में सरकार ने हालात, तैयारियों और विदेश नीति पर विपक्ष के सभी सवालों के जवाब दिए।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (Image Source: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई, जिसमें देश की विदेश नीति और मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जबकि गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
बैठक के दौरान विपक्ष की ओर से ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश को लेकर सवाल उठाए गए। इसी पर जवाब देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत, पाकिस्तान की तरह दलाल देश बनकर काम नहीं करेगा। उनका यह बयान बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी। इस पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी थी, जिसके बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
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ऑल पार्टी मीटिंग में विपक्षी सांसदों ने इसी मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रुख मांगा। सरकार ने जवाब में कहा कि पाकिस्तान 1981 से इस तरह की भूमिका निभाता रहा है और इसमें कुछ नया नहीं है। साथ ही यह भी साफ किया गया कि भारत अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति पर कायम रहेगा। सरकार ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका पाकिस्तान के जरिए बातचीत करना चाहता है तो भारत उस पर नियंत्रण नहीं कर सकता, लेकिन भारत खुद इस तरह की भूमिका नहीं निभाएगा।
करीब दो घंटे चली इस बैठक में पश्चिम एशिया के हालात, भारत पर संभावित असर और सरकार की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने सभी सवालों के जवाब दिए और कई भ्रम दूर किए। बैठक में होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और गैस आपूर्ति को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार ने बताया कि भारत ने पहले ही चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं, जिससे आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। इस पर विपक्षी सदस्य भी संतुष्ट नजर आए।
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हालांकि, कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने बैठक को देर से उठाया गया कदम बताते हुए प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है और हर जरूरी कदम उठा रहा है। अंत में सभी दलों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि इस संकट की घड़ी में वे सरकार के साथ खड़े हैं और देशहित में लिए गए हर फैसले का समर्थन करेंगे।