उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: शाही मस्जिद की कार्रवाई के विरोध में बवाल, 10 लोगों पर FIR दर्ज, जानिये अब तक क्या-क्या हुआ?

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर उपजा विवाद। पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद शहर काजी और कलेक्टर की शांति की अपील। जानिये इस खास रिपोर्ट में की अभी तक क्या क्या हुआ?

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 28 September 2026, 4:20 PM IST

Ujjain: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने की प्रक्रिया के दौरान सोमवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा। इस पूरी घटना में उपद्रव और विरोध प्रदर्शन के चलते पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वहीं, बिगड़ते हालातों को देखते हुए शहर काजी और जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की है।

मास्टर प्लान 2035 के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई

यह पूरा घटनाक्रम उज्जैन के कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक के मार्ग पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा हुआ है। उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के अंतर्गत इस मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। प्रशासन का कहना है कि शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा इस निर्धारित सड़क सीमा के दायरे में आ रहा है, जिसके कारण आवागमन को सुगम बनाने के लिए इस हिस्से को हटाने की आवश्यकता है। कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार, वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को आपस में जोड़ता है, इसलिए श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए मास्टर प्लान के अनुरूप सड़कों का चौड़ीकरण बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग विकास के इन कार्यों में स्वेच्छा से अपना सहयोग दे रहे हैं।

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सुबह शुरू हुआ संवाद, दोपहर में बिगड़े हालात और लाठीचार्ज

सोमवार सुबह प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच आपसी बातचीत हुई, जिसके बाद समाज के कुछ लोग स्वेच्छा से शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने के लिए आगे आए। हालांकि, इसी दौरान वहां नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ लोगों ने इस कार्रवाई का खुला विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध बढ़ने पर स्थिति अनियंत्रित होने लगी, जिसे संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

विरोध का दायरा बढ़ता देख मुस्लिम समाज का एक बड़ा तबका आगर नाके के पास इकट्ठा हो गया। दोपहर करीब 12 बजे स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ लोगों ने दोबारा पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने इस मामले में हुड़दंग और उपद्रव करने वाले 10 लोगों के खिलाफ नामजद और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। तनाव को भांपते हुए शनिवार रात से ही मस्जिद के भीतर और बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए बैरिकेडिंग कर दी थी और भारी पुलिस बल के साथ आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) को तैनात कर दिया था।

शहर काजी और प्रशासन की शांति की अपील

हालात की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने आगे आकर समाज के लोगों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद से जुड़ा मसला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ चुका था और जो भी काम हो रहा है, वह तय सहमति के आधार पर ही किया जा रहा है। शहर काजी ने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और बेवजह बाजारों में भीड़ न लगाएं। उन्होंने हिदायत दी कि ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है जिसके लिए घरों से बाहर निकलने की आवश्यकता हो, इसलिए लोग अफवाहों के बहकावे में न आएं।

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हाई कोर्ट की युगलपीठ में सुनवाई और मस्जिद पक्ष के दावे

इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहले ही न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है। मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह इमारत 100 साल से अधिक पुरानी एक ऐतिहासिक धरोहर है और उनके पास इसके समर्थन में पुख्ता दस्तावेज भी मौजूद हैं। इमाम मोहम्मद इब्राहिम के अनुसार, शाही मस्जिद करीब 636 साल पुरानी है और उनका कहना है कि इसके एक हिस्से को हटाने से पूरी प्राचीन संरचना की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। मौजूदा कार्रवाई के तहत मस्जिद के एक छोर से करीब चार फीट और दूसरे छोर से नौ फीट का हिस्सा हटाया जा रहा है।

मस्जिद कमेटी की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि वर्ष 1975 में यातायात की सुविधा के लिए मस्जिद परिसर की तरफ से जमीन दी गई थी, जिस पर वर्तमान में 40 फीट चौड़ी सड़क बनी हुई है। इस मामले में एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद, मस्जिद कमेटी ने उच्च न्यायालय की इंदौर स्थित युगलपीठ के समक्ष चुनौती दी है, जिस पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की युगलपीठ के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

बाहरी सियासत भी गरमाई

उज्जैन की इस घटना का असर स्थानीय स्तर से बाहर राष्ट्रीय राजनीति तक भी देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया के जरिए इस पूरी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मस्जिद के हिस्से को हटाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि वक्फ कानून में संशोधन लाने का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों के माध्यम से देश भर की मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों और कब्रिस्तानों को मुस्लिम समुदाय के अधिकार क्षेत्र से बाहर करना है।

Location :  Ujjain

Published :  28 September 2026, 4:12 PM IST