
टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश शुरू (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: टाटा का नाम सुनते ही भरोसे का आभास होता है। करीब डेढ़ सौ साल पहले जमशेदजी टाटा ने जिस कारोबारी सफर की शुरुआत की थी, वह आज नमक से लेकर स्टील, कार, सॉफ्टवेयर, एयरलाइन, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार तक फैले एक विशाल वैश्विक कारोबारी समूह में बदल चुका है। लेकिन अब इसी टाटा समूह के सामने नेतृत्व परिवर्तन का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने संकेत साफ कर दिया है कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद आगे चेयरमैन पद पर नहीं रहेंगे। उनका वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होगा, यानी वह तत्काल पद नहीं छोड़ रहे हैं, लेकिन उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है।
और यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है- चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस की कमान किसके हाथ होगी? क्या टाटा समूह फिर किसी अनुभवी प्रोफेशनल पर भरोसा करेगा? क्या टाटा स्टील के CEO और MD टी.वी. नरेंद्रन इस रेस में सबसे आगे हैं? क्या ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी सौरभ अग्रवाल जैसे नामों पर विचार हो सकता है? या फिर चयन समिति कोई ऐसा नाम सामने लाएगी, जिसकी अभी उतनी चर्चा भी नहीं हो रही? क्योंकि यह सिर्फ एक चेयरमैन बदलने की कहानी नहीं है, यह टाटा समूह के अगले अध्याय की कहानी है।
वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने अपने चर्चित शो The MTA Speaks में टाटा संस के अगले चेयरमैन की रेस में कौन-कौन से नाम आगे हैं, को लेकर सटीक विश्लेषण किया।
टाटा की कहानी आज की नहीं है। साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने जिस कारोबारी सफर की शुरुआत की थी, उनका सपना सिर्फ एक बड़ा कारोबार खड़ा करना नहीं था, बल्कि भारत में उद्योग, शिक्षा, विज्ञान और समाज के विकास को गति देना था और यही सोच आगे चलकर टाटा समूह की पहचान बनी। इसके बाद जे.आर.डी. टाटा का दौर आया, जिन्होंने लंबे समय तक समूह का नेतृत्व किया और औद्योगिक, तकनीकी तथा विमानन क्षेत्रों में टाटा का विस्तार किया। फिर आया 1991 का साल और इसी दौर में रतन टाटा ने टाटा समूह की कमान संभाली। रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा सिर्फ भारत का बड़ा कारोबारी समूह नहीं रहा, बल्कि दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बनाने लगा। Tetley, Corus और Jaguar Land Rover जैसे बड़े अधिग्रहणों ने टाटा को एक ग्लोबल कारोबारी शक्ति के रूप में स्थापित किया। यानी टाटा के इतिहास को देखें तो हर दौर में नेतृत्व बदला और उसके साथ टाटा की दिशा भी बदली।
फिर 2017 में एक और बड़ा बदलाव आया, जब एन. चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बने। यह नियुक्ति इसलिए खास थी क्योंकि चंद्रशेखरन टाटा परिवार से नहीं आते थे, बल्कि एक प्रोफेशनल थे, जिन्होंने TCS से अपना सफर शुरू किया, कंपनी के CEO और MD बने और इसके बाद पूरे टाटा समूह की सबसे महत्वपूर्ण कंपनी टाटा संस की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने टेक्नोलॉजी, डिजिटल कारोबार और नए उद्योगों पर जोर बढ़ाया। Air India का अधिग्रहण हुआ, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की दिशा बनी और समूह ने भविष्य के कारोबार के लिए नई जमीन तैयार करने की कोशिश की।
अब करीब एक दशक बाद चंद्रशेखरन के दौर का अंत तय हो चुका है। वह फरवरी 2027 तक अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे, लेकिन इसके बाद नए कार्यकाल के लिए आगे नहीं बढ़ेंगे। इसका मतलब है कि टाटा समूह के पास नए नेतृत्व की तलाश और चयन की पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए समय है। लेकिन सवाल है कि यह कमान किसे मिलेगी?
इस समय सबसे ज्यादा चर्चा टी.वी. नरेंद्रन की है। नरेंद्रन टाटा स्टील के CEO और MD हैं, लंबे समय से टाटा समूह से जुड़े हैं और स्टील जैसे बड़े और वैश्विक कारोबार को संभालने का अनुभव रखते हैं। उनके पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि वह टाटा की कार्यशैली, संस्कृति और कारोबारी ढांचे को अच्छी तरह समझते हैं और समूह के भीतर लंबे अनुभव के कारण उन्हें अलग-अलग कारोबारी चुनौतियों का भी सामना करने का अनुभव है। इसलिए उन्हें संभावित दावेदारों में एक मजबूत नाम माना जा रहा है।
लेकिन यहां एक बात बिल्कुल साफ समझनी जरूरी है- टी.वी. नरेंद्रन का नाम चर्चा में जरूर है, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि वही टाटा संस के अगले चेयरमैन होंगे। नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया अभी बाकी है और पांच सदस्यीय Selection Committee संभावित उम्मीदवारों की योग्यता, अनुभव, नेतृत्व क्षमता और समूह के भविष्य के लिए उनकी दृष्टि पर विचार करेगी। इसलिए अभी किसी एक नाम को अगला चेयरमैन घोषित करना जल्दबाजी होगी। टी.वी. नरेंद्रन के अलावा टाटा समूह के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं, जिनमें ग्रुप के वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी सौरभ अग्रवाल का नाम भी सामने आया है। लेकिन अंतिम तस्वीर चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
इस पूरी कहानी में एक और नाम बेहद महत्वपूर्ण है- नॉयल टाटा। नॉयल टाटा Tata Trusts के चेयरमैन हैं और Tata Trusts की Tata Sons में बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए नए चेयरमैन के चयन में Trusts की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि नॉयल टाटा खुद Tata Sons के अगले चेयरमैन बनने जा रहे हैं। फिलहाल उनकी भूमिका उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई देती है और इसलिए उनके नाम को लेकर किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
अब सवाल यह है कि टाटा ग्रुप के लिए नया चेयरमैन चुनना इतना महत्वपूर्ण क्यों है? क्योंकि आज का टाटा सिर्फ Tata Steel, Tata Motors या TCS तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में समूह के सामने कई बड़े अवसर और चुनौतियां हैं। Air India को एक मजबूत ग्लोबल एयरलाइन बनाना है, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करनी है, डिजिटल और AI आधारित कारोबार को आगे बढ़ाना है, TCS को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है और दूसरी तरफ Tata Motors तथा Tata Steel जैसे पुराने और बड़े कारोबारों को बदलते वैश्विक बाजार के हिसाब से आगे बढ़ाना है।
यानी नए चेयरमैन के सामने सिर्फ मौजूदा कारोबार को संभालने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि उसे यह भी तय करना होगा कि आने वाले एक दशक में टाटा किस दिशा में आगे बढ़ेगा। यही इस पूरी कहानी को खास बनाता है। टाटा के अगले चेयरमैन को एक साथ दो जिम्मेदारियां निभानी होंगी- एक तरफ डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुरानी विरासत, भरोसे और मूल्यों को बचाना और दूसरी तरफ भविष्य के कारोबार के लिए नई जमीन तैयार करना।
जमशेदजी टाटा के समय दुनिया अलग थी, JRD Tata के समय दुनिया अलग थी, रतन टाटा के समय वैश्विक बाजार अलग था और चंद्रशेखरन के समय टाटा ने टेक्नोलॉजी और नए उद्योगों की तरफ कदम बढ़ाया, लेकिन 2027 के बाद की दुनिया और भी अलग होगी। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कारोबार की दिशा बदल रहा है, इलेक्ट्रिक वाहन ऑटोमोबाइल उद्योग को बदल रहे हैं, सेमीकंडक्टर वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं, डिजिटल कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और ग्लोबल सप्लाई चेन लगातार बदल रही है।
ऐसे समय में टाटा को सिर्फ एक अनुभवी प्रशासक नहीं, बल्कि ऐसा नेतृत्व चाहिए जो भविष्य को पहचान सके, बड़े जोखिमों को समझ सके, अलग-अलग कारोबारों के बीच संतुलन बना सके और टाटा की पहचान को भी मजबूत रख सके। यही वजह है कि टी.वी. नरेंद्रन जैसे अनुभवी नाम की चर्चा महत्वपूर्ण है, लेकिन Tata Sons की चेयरमैनशिप किसी एक कंपनी को चलाने से बिल्कुल अलग जिम्मेदारी है। यहां स्टील, ऑटोमोबाइल, IT, एयरलाइन, फाइनेंस, पावर, हॉस्पिटैलिटी और आने वाले समय में सेमीकंडक्टर तथा AI जैसे क्षेत्रों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाना होगा।
इसलिए Selection Committee के सामने चुनौती सिर्फ सबसे अनुभवी व्यक्ति चुनने की नहीं होगी, बल्कि ऐसे व्यक्ति को चुनने की होगी जो कारोबार को समझता हो, भविष्य को पहचानता हो, बड़े फैसले लेने की क्षमता रखता हो और टाटा की डेढ़ सौ साल पुरानी पहचान और मूल्यों को आगे लेकर चल सके।
और शायद इसी वजह से चंद्रशेखरन का जाना सिर्फ एक कारोबारी खबर नहीं है। यह टाटा समूह के लिए नेतृत्व परिवर्तन का वह मोड़ है, जहां से अगले कई वर्षों की दिशा तय हो सकती है। 2017 में जब चंद्रशेखरन ने कमान संभाली थी, तब टाटा के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं और 2027 में जब उनका कार्यकाल खत्म होगा, तब कारोबारी दुनिया पूरी तरह बदल चुकी होगी।
इसलिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चंद्रशेखरन के बाद कुर्सी पर कौन बैठेगा, बल्कि सवाल यह है कि वह व्यक्ति टाटा को अगले दशक में कहां लेकर जाएगा। क्या वह टी.वी. नरेंद्रन होंगे? क्या कोई दूसरा अनुभवी प्रोफेशनल सामने आएगा? क्या टाटा परिवार से जुड़ा कोई चेहरा भविष्य की भूमिका में दिखाई देगा? या फिर चयन समिति ऐसा नाम चुनेगी, जिसकी अभी चर्चा भी नहीं हो रही?
अभी इसका जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन इतना तय है कि टाटा की सबसे महत्वपूर्ण कुर्सियों में से एक के लिए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है और इस चयन का असर सिर्फ Tata Sons पर नहीं, बल्कि पूरे टाटा समूह की भविष्य की दिशा पर पड़ेगा। जमशेदजी टाटा ने एक सपना देखा था, JRD Tata ने उसे विस्तार दिया, रतन टाटा ने उसे दुनिया तक पहुंचाया और चंद्रशेखरन ने उसे नई तकनीक और नए कारोबारों की तरफ मोड़ा।
अब अगला सवाल है- अगला चेयरमैन टाटा की इस विरासत को किस दिशा में लेकर जाएगा? कुर्सी बदलेगी, चेहरा बदलेगा, लेकिन असली चुनौती यही होगी कि क्या नया नेतृत्व डेढ़ सौ साल पुरानी विरासत को बचाते हुए अगले कई दशकों का टाटा बना पाएगा। क्योंकि टाटा की कहानी में चेयरमैन बदलते रहे हैं, लेकिन एक चीज नहीं बदली- भरोसा। और अब देखना यही है कि उस भरोसे को अगली पीढ़ी तक कौन लेकर जाता है।
Location : New Delhi
Published : 17 August 2026, 8:19 AM IST