मतदाता सूची SIR विवाद खत्म: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकार को बताया पूरी तरह वैध

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में माना है। कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। याचिकाओं में उठे सवाल खारिज कर दिए गए।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 May 2026, 11:51 AM IST

New Delhi: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए इसे वैध करार दिया है। अदालत ने कहा कि एसआईआर कराना पूरी तरह से चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह प्रक्रिया संविधान के अनुरूप है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है, और इसी उद्देश्य से एसआईआर जैसी प्रक्रिया जरूरी मानी जा सकती है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे अब बुधवार को सुनाया गया। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं किया है और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी भी नियम के खिलाफ जाकर मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए हैं।

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एसआईआर को लेकर क्या था विवाद

यह मामला उस समय सामने आया जब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की। शुरुआत में यह अभियान बिहार में शुरू किया गया था, जिसके बाद इसे पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ाया गया।

इस प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाएं मुख्य रूप से पिछले वर्ष जून में दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की इस शक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि एसआईआर संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों के दायरे में नहीं आता।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियां

याचिकाओं में सबसे बड़ा मुद्दा उस शर्त को बताया गया जिसमें कहा गया था कि जिन मतदाताओं का नाम 2002 या कुछ राज्यों में 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें अपने किसी ऐसे पारिवारिक सदस्य से संबंध साबित करना होगा जिनका नाम उन पुरानी सूचियों में दर्ज है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह शर्त गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले नागरिकों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों के पास पुराने दस्तावेजों या रिकॉर्ड से जुड़ा प्रमाण जुटाना कठिन होता है, जिससे उनके मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावित मतदाताओं को राहत देने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरिम निर्देश भी जारी किए थे। शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज निर्धारित किए थे, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।

सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि मतदाता सूची को साफ, सटीक और त्रुटिरहित बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। आयोग का कहना था कि फर्जी या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाने और सूची को अपडेट करने के लिए एसआईआर जैसी प्रक्रिया जरूरी है। आयोग ने इसे मुक्त और निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला बताया।

Location :  New Delhi

Published :  27 May 2026, 11:51 AM IST