Supreme Court: सिर्फ बिल्डर नहीं जिम्मेदार अफसर भी नपेंगे, SC ने असुरक्षित भवनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की मांगी रिपोर्ट

देशभर में अवैध और असुरक्षित इमारतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगम अधिकारियों से खतरनाक भवनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है और निर्देशों का पालन नहीं होने पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 July 2026, 4:40 PM IST

New Delhi: देश के कई शहरों में इमारत गिरने और आग लगने जैसी घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवैध और खतरनाक भवनों के मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगम और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में मौजूद असुरक्षित भवनों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के साकेत में इमारत गिरने और मालवीय नगर तथा लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं का संज्ञान लिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं लोगों की जान और संपत्ति के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं और इन्हें रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि खतरनाक भवनों को गिराने, सील करने या खाली कराने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

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कोर्ट में पेश होने का आदेश

अदालत ने नगर निगम और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को 20 मई को जारी निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई की तारीख 4 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई या आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

बनाई जाएगी विशेष टीम

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराने के लिए एक विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस टीम में IIT दिल्ली के दो वरिष्ठ प्रोफेसर, दो ड्राफ्ट्समैन और नगर निगम के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) क्षेत्र के सरोजिनी नगर में भी इसी प्रकार का सर्वे कराया जाएगा। अदालत ने कहा कि सर्वे पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किया जाना चाहिए।

गलत रिपोर्ट पर होगी सख्त कार्रवाई

कोर्ट ने साफ कहा कि समिति की रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यात्मक और ईमानदार होनी चाहिए। यदि रिपोर्ट में किसी तरह की गड़बड़ी या जानकारी छिपाने की कोशिश सामने आती है, तो अदालत स्वतंत्र जांच कराने के लिए अलग टीम भी भेज सकती है। अदालत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

आदेशों की अनदेखी पर हो सकती है अवमानना की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अगली सुनवाई तक संबंधित विभागों ने कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल नहीं की या निर्देशों का पालन नहीं किया, तो अदालत स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना की कार्रवाई शुरू कर सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के कमिश्नर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह माना जाएगा।

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अधिकारियों और बिल्डरों दोनों पर रहेगी नजर

अदालत ने यह भी कहा कि अक्सर हादसे होने के बाद केवल बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई होती है, जबकि समय रहते कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होती। इसलिए संबंधित प्राधिकरणों को अपनी रिपोर्ट में उन अधिकारियों के नाम भी बताने होंगे, जिनकी लापरवाही के कारण अवैध निर्माण जारी रहे। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Location :  New Delhi

Published :  9 July 2026, 4:40 PM IST