आखिर क्यों राहुल गांधी ने इस केंद्रीय मंत्री को बताया गद्दार, कभी थे सबसे पक्के दोस्त!

संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया, जिसका वीडियो अब चर्चा में है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 4 February 2026, 12:43 PM IST

New Delhi: संसद के भीतर आमतौर पर कानून और नीतियों पर बहस होती है, लेकिन आज मकर द्वार पर सियासत ने बिल्कुल अलग रंग ले लिया। तख्तियां, नारे और कैमरों की मौजूदगी में ऐसा सीन बना, जिसने संसद के माहौल को अचानक गरमा दिया। कांग्रेस सांसद प्रदर्शन कर रहे थे और तभी आमने-सामने आ गए राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू। कुछ सेकंड की यह मुलाकात देखते ही देखते जुबानी जंग में बदल गई, जिसका वीडियो अब सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।

मकर द्वार पर टकराव

कांग्रेस सांसद हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी वहां पहुंचे और अपने सांसदों की तारीफ करते नजर आए। तभी सामने से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आ गए। माहौल अचानक सख्त हो गया। राहुल गांधी ने बिट्टू को देखकर हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन बिट्टू ने हाथ आगे नहीं बढ़ाया। कैमरे के सामने राहुल गांधी ने उन्हें “गद्दार दोस्त” कह दिया।

हैंडशेक से बयान तक

राहुल गांधी का यह कमेंट सुनते ही बिट्टू भी चुप नहीं रहे। उन्होंने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि उनका “देश के दुश्मनों” से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ ही पलों में यह मुलाकात राजनीतिक बयानबाजी में बदल गई। वहां मौजूद सांसद और सुरक्षाकर्मी भी एक पल के लिए ठिठक गए।

कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू

रवनीत सिंह बिट्टू तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके हैं। पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीत दर्ज की। खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर विरोधी माने जाने वाले बिट्टू ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।

चुनाव हारे, फिर भी मंत्री

2024 के चुनाव में बिट्टू को लुधियाना सीट से कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के हाथों करीब 20 हजार वोटों से हार मिली। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उन्हें रेल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी, जिसे लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस होती रही है।

निजी इतिहास और राहुल कनेक्शन

बिट्टू की निजी जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही है। 11 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था। 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को खो दिया, जिनकी 1995 में चंडीगढ़ में हत्या कर दी गई थी। 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा था।

पहले भी हो चुकी है बयानबाजी

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और बिट्टू आमने-सामने आए हों। सितंबर 2024 में बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने का आरोप लगाया था और विवादास्पद बयान देते हुए उन्हें “देश का नंबर वन टेरेरिस्ट” तक कह दिया था। आज का टकराव उसी पुरानी तल्खी की याद दिलाता है।

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Published : 
  • 4 February 2026, 12:43 PM IST