PM मोदी ने लिया नाम और फिर चर्चा में छा गया लंगड़ा आम, 300 साल पुरानी कहानी कर देगी हैरान

PM मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में गर्मियों के फलों, खासकर आम का जिक्र किया, जिसमें दशहरी और बनारस का प्रसिद्ध ‘लंगड़ा आम’ शामिल रहा। इसके बाद एक बार फिर लंगड़ा आम चर्चा में आ गया।

Updated : 2 June 2026, 2:50 PM IST

New Delhi:  गर्मी का मौसम आते ही घरों में आम की बातें शुरू हो जाती हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आम का जिक्र करते हुए दशहरी और लंगड़ा जैसी मशहूर वैरायटी की खूबियां बताईं। इसके बाद एक बार फिर बनारस का ‘लंगड़ा आम’ सुर्खियों में आ गया है।

काशी की धरती पर

लंगड़ा आम सिर्फ अपने स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी कहानी के लिए भी जाना जाता है। कहा जाता है कि करीब 300 साल पहले 18वीं सदी में इसकी शुरुआत काशी की धरती पर हुई थी। मान्यता है कि मालदा से आए एक साधु अपने साथ आम का बीज लेकर बनारस पहुंचे थे। उन्होंने उस बीज को यहां बोया और कुछ समय बाद उससे पेड़ तैयार हुए। जब पेड़ों में फल आने लगे तो साधु इन आमों को भगवान शिव को अर्पित कर प्रसाद के रूप में लोगों में बांटने लगे।

शाही बागानों में इसकी खेती शुरू

धीरे-धीरे इस आम के खास स्वाद और खुशबू की चर्चा पूरे शहर में फैलने लगी। इसकी मिठास की खबर उस दौर के काशी नरेश तक भी पहुंची। बताया जाता है कि काशी नरेश ने भी अपने बागों में इस खास किस्म के आम को लगाने की इच्छा जताई। शुरुआत में साधु ने बीज देने में हिचक दिखाई, लेकिन बाद में बीज राजपरिवार तक पहुंचे और फिर शाही बागानों में इसकी खेती शुरू हुई।

इस आम के नाम के पीछे की कहानी भी कम रोचक नहीं है। जिस साधु ने बनारस में इस आम को पहचान दिलाई, लोग उन्हें ‘लंगड़ा बाबा’ के नाम से जानते थे। माना जाता है कि उन्हीं के नाम पर इस आम को ‘लंगड़ा आम’ कहा जाने लगा।

क्या आप भी Stress कम करने के लिए रोज पीते हैं शराब? जानिए इसका सच

लंगड़ा आम की सबसे अलग पहचान यह है कि पकने के बाद भी इसका रंग पूरी तरह पीला नहीं होता। बाहर से यह अक्सर हरा दिखाई देता है, लेकिन स्वाद ऐसा कि एक बार खाने वाला इसका दीवाना हो जाए। इसकी खुशबू और गूदा इसे दूसरी किस्मों से अलग बनाते हैं।

आखिर क्यों ‘टावर’ बन रहा लोगों का नया ड्रामा स्पॉट? जानें UP ‘टावर ट्रेंड’ का सच

आखिरी दिनों से लेकर जून की शुरुआत

साल 2023 में बनारसी लंगड़ा आम को GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत हुई। अब यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कई विदेशी बाजारों तक पहुंच चुका है। खाड़ी देशों समेत कई जगहों पर इसकी मांग बढ़ रही है। आमतौर पर मई के आखिरी दिनों से लेकर जून की शुरुआत में यह बाजारों में नजर आने लगता है।

Location :  New Delhi

Published :  2 June 2026, 2:50 PM IST