प्रधानमंत्री मोदी के प्रशासनिक जीवन के 25 साल पूरे, कहा- ‘मिशन’ के लिए जिया, ‘जनता जनार्दन’ ही मेरी असली ताकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशासनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जनता ही उनका ईश्वर है और वे महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि मिशन के लिए जीते हैं। इस दौरान उन्होंने 'वी विल डू इट' का संकल्प दोहराया।

Updated : 7 October 2026, 3:08 PM IST
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New Delhi: भारतीय राजनीति और प्रशासन के क्षितिज पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिया है। इस मौके पर दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पीएम मोदी ने देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित किया। सात अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने यह नहीं सोचा था कि सार्वजनिक जीवन का यह पड़ाव भी आएगा। इस पूरी यात्रा को उन्होंने सत्ता का सुख नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपनी अनवरत साधना बताया है।

जनता ही ईश्वर, देश ही सब कुछ: पीएम मोदी

अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं, उसके केंद्र में 'जनता जनार्दन' का अटूट आशीर्वाद है। जनता को ही अपना असली ईश्वर और शक्ति बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के नागरिकों का उनके ऊपर सबसे बड़ा हक है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह महत्वाकांक्षा (एंबीशन) के लिए नहीं, बल्कि एक तय मिशन के लिए जीने वाले इंसान हैं। बाल्यकाल से मिले संस्कारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति में चमकने की उनकी कभी इच्छा नहीं रही, बल्कि उनका एकमात्र ध्येय देश के लिए निस्वार्थ भाव से कर्म करना रहा है।

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संघर्षों और अनुभवों से गढ़ी गई कार्यशैली

प्रधानमंत्री ने अपनी लंबी प्रशासनिक यात्रा के दौरान मिले विभिन्न अनुभवों का बेहद प्रेरणादायक उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशन ने उन्हें हर असफलता से सीखकर फिर उठना सिखाया, तो वैश्विक महामारी कोरोना ने देश को सामूहिक चेतना का पाठ पढ़ाया। मीडिया की भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि तमाम खट्टे-मीठे अनुभवों ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। देश के गांवों और गरीबों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने सिखाया है कि भले ही संसाधन सीमित हों, लेकिन सपने और हौसले हमेशा बुलंद होने चाहिए। वेदों से लेकर स्वामी विवेकानंद के विचारों तक, इस महान राष्ट्र की हजारों साल की विरासत ने उन्हें कभी भी अकेला महसूस नहीं होने दिया।

‘वी विल डू इट’: देश के नए संकल्प का उद्घोष

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व जोश भरा और आने वाले भविष्य के लिए कई बड़े राष्ट्रीय संकल्प दोहराए। उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ पुरानी यादों को ताजा करने का नहीं, बल्कि 'हम करके रहेंगे' के संकल्प को नई ऊर्जा देने का है। उन्होंने लाल किले से दिए गए ‘सबका प्रयास’ के मंत्र को दोहराते हुए एक नया आत्मविश्वास जगाया। पीएम मोदी ने उद्घोष किया-

विकसित भारत 2047 - वी विल डू इट।

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी - वी विल डू इट।

आत्मनिर्भर भारत और अंतरिक्ष में कदम - वी विल डू इट।

ओलिंपिक्स का आयोजन - वी विल डू इट।

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गीता के कर्मयोग को बनाया जीवन का आधार

गीता के श्लोक "कर्मण्ये वाधिकारस्ते" का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए कर्म ही पूजा और धर्म है। उन्होंने कहा कि बिना किसी फल की आसक्ति के निरंतर प्रयास करना ही उनकी साधना है। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि इस महान और पुण्यभूमि भारत में जन्म लेना ही किसी अमृत अहसास से कम है, जिसके आगे कोई भी पद या सत्ता सुख कोई मायने नहीं रखता। इस ऐतिहासिक सफर के हर पड़ाव पर साथ निभाने वाले प्रत्येक स्वयंसेवक और कार्यकर्ता का आभार जताते हुए उन्होंने देशसेवा के अपने संकल्प को और अधिक दृढ़ किया।

Location :  New Delhi

Published :  7 October 2026, 3:05 PM IST

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