Petrol Diesel Price Hike: एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, दिल्ली समेत महानगरों में आम जनता परेशान

देश में एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों ने करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत सभी बड़े शहरों में ईंधन महंगा होने से आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 May 2026, 9:48 AM IST

New Delhi: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक इजाफा किया। खास बात यह है कि महज एक हफ्ते के भीतर ईंधन कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले शुक्रवार को ही पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। लगातार बढ़ रही कीमतों से आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंचा

नई बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं डीजल की कीमत में 91 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद यह 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इससे पहले तीन रुपये की वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था।

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महानगरों में भी बढ़े ईंधन के दाम

दिल्ली के अलावा देश के अन्य बड़े शहरों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई में पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा 96 पैसे की वृद्धि हुई, जिसके बाद वहां पेट्रोल 109.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।

चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे महंगा होकर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़ने के बाद 96.11 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है।

अंतरराष्ट्रीय संकट बना बड़ी वजह

पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को बड़ी वजह माना जा रहा है। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं ने कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित किया है।

इसी साल 28 फरवरी से अमेरिका और इस्राइल का ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है। कच्चा तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के बीच लंबे युद्धविराम को लेकर बातचीत की कोशिशें जारी हैं।

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तेल कंपनियों का घाटा कुछ कम हुआ

सरकार द्वारा तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी किए जाने के बाद सरकारी तेल कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिली है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कीमतों में वृद्धि के बाद कंपनियों का दैनिक घाटा करीब 25 फीसदी कम होकर 750 करोड़ रुपये रह गया है। इससे पहले यह घाटा लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि फिलहाल तेल कंपनियों को राहत देने के लिए किसी विशेष पैकेज या सब्सिडी पर विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद सरकारी कंपनियां 15 मई तक पुराने दामों पर ही पेट्रोल और डीजल बेचती रहीं।

Location :  New Delhi

Published :  19 May 2026, 9:48 AM IST