दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर लगेगा नॉइज बैरियर, गाड़ियों के शोर से मिलेगी राहत? NHAI ने बनाया प्लान

दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के दोनों ओर NHAI नॉइज बैरियर लगाने की योजना पर काम करेगा। अगले एक महीने में लागत का आकलन किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य आसपास की आवासीय सोसायटियों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने वाले वाहनों के शोर को कम करना है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 26 October 2026, 12:39 PM IST

New Delhi: दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के आसपास रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दिन-रात दौड़ती गाड़ियों के हॉर्न, इंजन और टायरों की आवाज से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एक्सप्रेसवे के दोनों ओर नॉइज बैरियर लगाने की योजना पर काम करने जा रहा है। इसके लिए अगले एक महीने के भीतर संभावित खर्च का आकलन किया जाएगा। इसके बाद योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर तैयार होने वाली यह व्यवस्था सड़क से उठने वाले शोर को आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोकने में मदद कर सकती है। हालांकि, अभी यह योजना शुरुआती चरण में है और इसकी स्थापना की समयसीमा तथा लागत को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है।

किनारे रहने वालों को क्यों है राहत की उम्मीद?

दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। दिल्ली और गुरुग्राम के बीच रोजाना बड़ी संख्या में कारों, बसों, ट्रकों और दूसरे वाहनों की आवाजाही होती है। यातायात का दबाव बढ़ने के साथ सड़क के आसपास रहने वाले लोगों को वाहनों के शोर का भी सामना करना पड़ता है। एक्सप्रेसवे के नजदीक बनी आवासीय सोसायटियों और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह शोर रोजमर्रा की परेशानी बन सकता है। गाड़ियों के हॉर्न, इंजन की आवाज और टायरों के सड़क से संपर्क के कारण पैदा होने वाला शोर घरों तक पहुंचता है। व्यस्त समय में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ यह समस्या और महसूस होती है।

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क्या होता है नॉइज बैरियर और कैसे करता है काम?

नॉइज बैरियर एक तरह का ध्वनि अवरोधक होता है, जिसे सड़क और आसपास के रिहायशी क्षेत्र के बीच लगाया जाता है। इसका उद्देश्य वाहनों से पैदा होने वाली आवाज के सीधे फैलाव को रोकना या कम करना है। ये बैरियर आमतौर पर विशेष पैनल, कंक्रीट या अन्य उपयुक्त ध्वनि-अवरोधक सामग्री से बनाए जा सकते हैं। इनकी प्रभावशीलता कई बातों पर निर्भर करती है। बैरियर की ऊंचाई, उसकी लंबाई, इस्तेमाल की गई सामग्री, सड़क से दूरी और आसपास की इमारतों की बनावट इसके असर को प्रभावित करती है। सही जगह पर लगाया गया बैरियर ध्वनि के सीधे रास्ते को बाधित करता है, जिससे सड़क के दूसरी ओर पहुंचने वाला शोर कम हो सकता है।

द्वारका एक्सप्रेसवे की तर्ज पर तैयार होगी व्यवस्था

दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर नॉइज बैरियर लगाने के लिए द्वारका एक्सप्रेसवे की व्यवस्था को उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क से उठने वाली आवाज के आसपास के रिहायशी क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है। NHAI की योजना के मुताबिक, अगले एक महीने में नॉइज बैरियर लगाने पर आने वाले खर्च का आकलन किया जाएगा। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने से संबंधित प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल योजना की कुल लागत, बैरियर की लंबाई, किन हिस्सों में इन्हें लगाया जाएगा और निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इस बारे में अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।

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स्थानीय लोगों ने उठाया बढ़ते शोर का मुद्दा

गुरुग्राम के सेक्टर-15 पार्ट-दो में रहने वाले सेवानिवृत्त इंजीनियर विमल वर्मा का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जाम की समस्या के साथ गाड़ियों का शोर भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। उनके मुताबिक, नॉइज बैरियर सड़क और रिहायशी क्षेत्र के बीच ध्वनि अवरोधक की तरह काम करते हैं। इनकी बनावट और स्थापना की जगह सही हो, तो वाहनों की आवाज को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

NHAI ने क्या कहा?

NHAI के परियोजना निदेशक भवनेश कुमार के मुताबिक, दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के दोनों ओर नॉइज बैरियर लगाने की दिशा में काम किया जाएगा। अगले एक महीने के भीतर इस पर होने वाले खर्च का आकलन किया जाएगा और उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना से पहले कोई सर्वे नहीं किया गया है। उनके अनुसार, कुछ कार्यों के लिए सर्वे की आवश्यकता नहीं होती। एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है और इसके साथ शोर की समस्या भी बढ़ रही है। इसी स्थिति को देखते हुए नॉइज बैरियर लगाने की योजना पर काम किया जाएगा।

Location :  New Delhi

Published :  26 October 2026, 12:39 PM IST