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एक दिन, चार शहर और नवरात्र के खुशियों के बीच चीख-पुकार (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: नवरात्रि का पावन पर्व, चारों तरफ गूंजते मां दुर्गा के जयकारे, भव्य पंडाल और उत्सव का उल्लास- देश भर में इन दिनों यही माहौल था। लेकिन इस पावन अवसर पर खुशियों का यह माहौल अचानक चीख-पुकार और मातम में बदल गया। महज एक ही दिन के अंतराल में देश के चार अलग-अलग शहरों (कोलकाता, बलरामपुर (यूपी), ग्वालियर और हैदराबाद) में हुई भीषण दुर्घटनाओं ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। इन दर्दनाक हादसों में कुल 36 लोगों की जान चली गई, जबकि 80 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस त्रासद घड़ी में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इन मौतों का असली जिम्मेदार कौन है भीड़ प्रबंधन में भारी लापरवाही, सुरक्षा नियमों की अनदेखी, या फिर व्यवस्थाओं की गंभीर नाकामी?
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम यानी 17 अक्टूबर 2026 को जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया। भारी बारिश शुरू होते ही पंडाल के बाहर खड़े लोग अचानक अंदर घुसने के लिए बेकाबू होकर दौड़ पड़े। अफरा-तफरी के बीच कई लोग सड़क पर गिर गए और देखते ही देखते भयानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में 19 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 15 से 25 लोग घायल हुए।
कुम्हारटोली के रहने वाले 25 वर्षीय सोनू पाल ने अपनी आंखों के सामने अपनी मां को दम तोड़ते देखा, जिनकी इस हादसे में मौत हो गई। इस त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए, जिसके तहत पुलिस ने पूजा आयोजकों समेत 12 लोगों को हिरासत में ले लिया है। सवाल यह है कि जब भारी भीड़ और बारिश की आशंका पहले से थी, तो पंडाल में ऐसे हालात से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा और निकास द्वार की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में भी दुर्गा पंडाल के बाहर दर्दनाक हादसा सामने आया। कोतवाली देहात क्षेत्र के बेलहा गांव में शनिवार रात करीब 11 बजे आरती समाप्त होने के बाद कुछ लोग सड़क किनारे पर्दा लगाकर वीडियो देख रहे थे। तभी गौरा रोड की तरफ से आ रही एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कार ने वहां बैठे आठ लोगों को बुरी तरह रौंद दिया।
इस भीषण टक्कर में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में ले लिया है और उसके नशे में होने की आशंका की गहराई से जांच की जा रही है। क्या त्योहार के समय व्यस्त मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं थी?
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के रास्ते पर नवरात्रि के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ पर एक ट्रक काल बनकर टूट पड़ा। रविवार तड़के करीब 1:30 बजे छिनौर की तरफ से आ रहा धान से भरा एक अनियंत्रित और ओवरलोडेड ट्रक पुलिस के बैरिकेड्स और चेकपॉइंट को तोड़ते हुए नीचे जा उतरा, जबकि उस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी।
ब्रेक फेल होने या तकनीकी खराबी के कारण चालक नियंत्रण खो बैठा और उसने सड़क किनारे श्रद्धालुओं तथा प्रसाद की दुकानों को कुचलते हुए मंदिर की बाहरी दीवार को टक्कर मार दी। इस भयावह हादसे में 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 40 लोग घायल हुए, जिनमें ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। यह घटना सीधे तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक इंजीनियरिंग कॉलेज में शनिवार को आयोजित डांडिया कार्यक्रम के दौरान प्रकृति और व्यवस्था की लापरवाही का एक और उदाहरण देखने को मिला। तेज हवाओं के कारण लाइटिंग के लिए बनाया गया भारी-भरकम प्रवेश द्वार अचानक भरभरा कर गिर गया।
इसकी चपेट में आने से एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य लोग घायल हो गए। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए घायलों के बेहतर इलाज और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अस्थायी निर्माण और मौसम के मिजाज को देखते हुए सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस हादसे का मुख्य कारण बनी।
एक ही दिन में देश के चार अलग-अलग कोनों में हुए ये हादसे किसी दैवीय आपदा नहीं, बल्कि इंसानी भूल और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। कोलकाता में पंडाल प्रबंधन की नाकामी, बलरामपुर में तेज रफ्तार व लापरवाही, ग्वालियर में प्रतिबंधित क्षेत्र में ओवरलोडेड ट्रक का प्रवेश और हैदराबाद में अस्थायी निर्माण की कमजोर मजबूती- इन सभी मामलों में यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या त्योहारों पर सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाती है और इसका असली जिम्मेदार कौन है?
Location : New Delhi
Published : 18 October 2026, 10:51 AM IST
Topics : Balrampur Accident Durga Puja stampede Gwalior Accident Hyderabad dandiya accident Kolkata stampede