
सर्वोच्च अदालत में टिकी हैं देश की निगाहें (Img: Pinterest)
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को UPI से जुड़े एक अहम मामले पर सुनवाई करने वाला है, जो देश में डिजिटल पेमेंट का मुख्य जरिया बन गया है। यह मामला केंद्र सरकार के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें 2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की बात कही गई है।
केंद्र सरकार ने UPI के जरिए दुकानदारों और कारोबारियों को 2,000 से ज्यादा के कुछ पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत तक का चार्ज लगाने का फैसला किया है। हालांकि, इस चार्ज के लिए एक अधिकतम सीमा तय की गई है; 75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए फीस ज्यादा से ज्यादा 300 होगी। वहीं, लोगों के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर (P2P) UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे।
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यह जनहित याचिका (PIL) वकील रंजन दत्ता ने दायर की है, जिसमें केंद्र के नोटिफिकेशन और MDR सिस्टम को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि UPI चार्ज लागू करने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श का पालन नहीं किया गया। याचिका में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की संशोधित धारा 10A की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के बीच किए गए फर्क पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि चूंकि RuPay कार्ड के लिए यह सुविधा मुफ्त है, इसलिए कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का कोई ठोस और उचित कारण होना चाहिए।
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सालों से UPI देश भर में बिना किसी लागत के डिजिटल पेमेंट की सुविधा दे रहा है। लाखों लोग छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई यह तय कर सकती है कि नई फ़ीस व्यवस्था को लागू करने का रास्ता कितना आसान होगा। सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई करेगी।
Location : New Delhi
Published : 27 September 2026, 7:45 PM IST