Manmohan Singh Birth Anniversary: डॉ. मनमोहन सिंह के फैसलों ने कैसे बदली भारत की आर्थिक दिशा

डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर उनके उस सफर को याद किया जा रहा है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था के एक अहम दौर को आकार दिया। 1991 के आर्थिक संकट से लेकर वित्त मंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक उनका जीवन भारतीय आर्थिक और राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ा रहा।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 26 September 2026, 9:08 AM IST
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New Delhi: 26 सितंबर 1932 को अविभाजित पंजाब के गाह गांव में जन्मे डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन अर्थशास्त्र, प्रशासन और राजनीति के लंबे सफर से जुड़ा रहा। 1991 में जब भारत गंभीर भुगतान संतुलन संकट का सामना कर रहा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने उन्हें वित्त मंत्री बनाया।

उस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार काफी कम हो गया था और जरूरी आयात के भुगतान को लेकर भी चुनौती खड़ी थी। आर्थिक मदद हासिल करने के लिए भारत को अपने सोने के भंडार को गिरवी रखने जैसे कदम उठाने पड़े।

वह बजट जिसने बदली आर्थिक नीति

1991 में वित्त मंत्री के तौर पर डॉ. मनमोहन सिंह ने केंद्रीय बजट पेश किया। इसी दौर में सरकार ने लाइसेंस-परमिट व्यवस्था में बदलाव, व्यापारिक बाधाओं को कम करने, विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने जैसे आर्थिक सुधार लागू किए।

इन नीतियों को लेकर उस समय और बाद में भी अलग-अलग मत रहे। आलोचकों ने असमानता और घरेलू उद्योगों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के असर को लेकर सवाल उठाए, जबकि समर्थकों ने इन्हें अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और विकास की नई राह खोलने वाला कदम बताया।

अर्थशास्त्री से प्रधानमंत्री तक का सफर

डॉ. मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे और अकादमिक क्षेत्र में भी काम किया। 1996 में वित्त मंत्री का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे।

वर्ष 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UPA गठबंधन की सरकार बनने के बाद वह प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2004 से 2014 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए। वह भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे।

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प्रधानमंत्री के तौर पर कई अहम फैसले

प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण दौर देखा। इस अवधि में पहले के आर्थिक सुधारों, घरेलू मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी असर रहा।

उनकी सरकार के प्रमुख फैसलों में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता शामिल था। इस समझौते ने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दी और भारत के लिए परमाणु सहयोग के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलीं।

हालांकि, उनके दूसरे कार्यकाल में आर्थिक विकास की रफ्तार में कमी, गठबंधन सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आलोचना भी हुई।

92 साल की उम्र में हुआ निधन

डॉ. मनमोहन सिंह का दिसंबर 2024 में नई दिल्ली के AIIMS में 92 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। उनके सार्वजनिक जीवन का सफर विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से लेकर RBI, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा।

उनकी जयंती पर 1991 के आर्थिक सुधारों से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में उनके एक दशक के कार्यकाल तक की यात्रा को भारतीय आर्थिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के तौर पर याद किया जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  26 September 2026, 9:08 AM IST

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