
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू (Image Source: Internet)
New Delhi: महिला आरक्षण कानून को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को जवाब देते हुए कहा कि इस कानून के क्रियान्वयन में देरी करना लाखों महिलाओं के साथ न्याय में देरी के समान है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा विषय है। रिजीजू ने विपक्ष से अपील की कि वह राजनीति से ऊपर उठकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जल्द लागू करने में सहयोग करे।
गौरतलब है कि खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार पर महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया था।
केंद्र सरकार अब इस कानून को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। किरेन रिजीजू ने बताया कि संसद का बजट सत्र बढ़ाया गया है और 16 से 18 अप्रैल तक विशेष बैठक बुलाई गई है।
इस बैठक में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने के लिए जरूरी संशोधनों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का कहना है कि सीमांकन से जुड़े बदलाव जरूरी हैं, ताकि महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
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रिजीजू के मुताबिक, यह कानून 2023 में पारित हुआ था और तब से ही इसे जल्द लागू करने की मांग की जा रही है। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रावधान है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे 2029 के आम चुनाव से पहले प्रभावी किया जाए।
किरेन रिजीजू ने साफ कहा कि महिलाओं से किए गए वादों को टालमटोल की राजनीति का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि जब इस कानून को लागू करने का समय आया है, तो अनावश्यक सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे वे असहमत हैं।
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उन्होंने याद दिलाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले तीन दशकों से चर्चा में रहा है और अब इसे और टालना सही नहीं होगा। रिजीजू के बयान से साफ है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और विपक्ष पर दबाव बना रही है। वहीं विपक्ष इस कानून के क्रियान्वयन की टाइमिंग और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।
Location : New Delhi
Published : 13 April 2026, 5:25 AM IST
Topics : Justice For Women Kiren Rijiju Nari Shakti Vandan Adhiniyam Women Empowerment India Women Reservation Act