Karnataka High Court Verdict: SC-ST आरक्षण पर बड़ा झटका, 56% कोटा रद्द होने से अब क्या बदलेगा?

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एससी आरक्षण 17 प्रतिशत और एसटी आरक्षण 7 प्रतिशत करने वाले 2022 के कानून के अहम प्रावधान रद्द कर दिए हैं। अदालत ने कुल आरक्षण 56 प्रतिशत करने को निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा के विपरीत माना। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील के विकल्प पर विचार करने की बात कही।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 13 October 2026, 8:46 AM IST

Karnataka:  कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरक्षण बढ़ाने वाले 2022 के कानून के अहम प्रावधानों को रद्द कर दिया है। इस कानून के तहत एससी का आरक्षण 15 से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और एसटी का 3 से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया गया था। ऐसे में सवाल है कि इस फैसले का शिक्षा और सरकारी नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा?

SC-ST आरक्षण बढ़ाने वाला कानून क्यों हुआ रद्द?

Karnataka High Court Verdict में अदालत ने आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 56 प्रतिशत करने से जुड़े प्रावधानों को असंवैधानिक ठहराया। मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति के.एस. हेमलेखा की पीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।

अदालत ने कर्नाटक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आरक्षण अधिनियम, 2022 की धारा 3 को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के विपरीत माना। वहीं, सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों से संबंधित धारा 4 को अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप नहीं पाया।

इस कानून के तहत एससी आरक्षण 17 प्रतिशत और एसटी आरक्षण 7 प्रतिशत किया गया था। इससे एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कुल आरक्षण 56 प्रतिशत हो गया था।

50 प्रतिशत आरक्षण सीमा पर अदालत का जोर

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा से आगे जाने वाले प्रावधानों को रद्द किया। इस सीमा का प्रमुख आधार सुप्रीम कोर्ट का 1992 का इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ फैसला है।

हाईकोर्ट का यह निर्णय कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर आया। इनमें एक याचिका डॉ. आंबेडकर अनुसूचित जाति महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्रा ने दाखिल की थी। दूसरी याचिका बेंगलुरु में सहायक अभियंता के पद के लिए आवेदन करने वाले तीन अभ्यर्थियों ने दायर की थी।

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बोम्मई सरकार के समय पारित हुआ था कानून

आरक्षण बढ़ाने वाला कानून तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में पारित हुआ था। इसके पीछे एससी-एसटी के प्रतिनिधित्व और आरक्षण से संबंधित विभिन्न समितियों की रिपोर्टों का हवाला दिया गया था।

परमेश्वर ने बताया गंभीर घटनाक्रम, सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने हाईकोर्ट के फैसले को गंभीर घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि इसका सामाजिक न्याय, शिक्षा और सरकारी नौकरियों के अवसरों पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

परमेश्वर के मुताबिक, राज्य सरकार न्यायपालिका और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करती है। हालांकि, सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील समेत सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के फैसले से 2022 के कानून के तहत बढ़ाया गया एससी-एसटी आरक्षण प्रभावित हुआ है। अब राज्य सरकार के अगले कदम और संभावित अपील पर नजर रहेगी। शिक्षा संस्थानों में प्रवेश और सरकारी भर्तियों पर वास्तविक असर संबंधित आदेशों तथा आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

Location :  New Delhi

Published :  13 October 2026, 8:46 AM IST