जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड: लोकसभा में पेश हुई जांच रिपोर्ट, तीनों आरोप पाए गए सही

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड की तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की गई।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 12 August 2026, 4:15 PM IST

New Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश के मामले की जांच रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की गई। तीन सदस्यों वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उन पर लगे तीनों आरोपों को सही पाया। हालांकि, समिति को इस मामले में किसी साजिश का कोई सबूत नहीं मिला।

सरकारी आवास के स्टोररूम में मिला कैश

यह मामला नई दिल्ली के तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से जुड़ा है। पिछले साल होली से एक दिन पहले उनके घर के स्टोररूम में आग लग गई थी। आग लगने के बाद वहां बड़ी मात्रा में 500 रुपये के नोट मिले थे।समिति के अनुसार, जस्टिस वर्मा यह साफ तौर पर नहीं बता पाए कि इतनी बड़ी रकम वहां कैसे पहुंची या वह किसकी थी। समिति ने कहा कि इतनी बड़ी रकम का लंबे समय तक बिना किसी की नजर में आए वहां पड़े रहना मुमकिन नहीं लगता।

तीन आरोप सही पाए गए

जांच समिति ने जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोपों को सही पाया। पहला आरोप सरकारी आवास में बिना हिसाब-किताब वाला भारी कैश मिलने से जुड़ा था। दूसरा आरोप सबूतों को सुरक्षित न रख पाने से संबंधित था। तीसरा आरोप जांच के दौरान उनके द्वारा दिए गए जवाबों से जुड़ा था।

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समिति ने पाया कि स्टोररूम को सील करने और जांच शुरू होने से पहले ही उसकी हालत बदल दी गई थी। इसके अलावा कुछ नोटों के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी गई जो बाद में गायब पाए गए। समिति ने इसे सबूतों को सुरक्षित रखने में भारी लापरवाही का मामला माना।

कई सवालों के साफ जवाब नहीं

रिपोर्ट में जांच के दौरान जस्टिस वर्मा द्वारा दिए गए जवाबों पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति के अनुसार कई सवालों के उनके जवाबों में स्पष्टता की कमी थी और कुछ मामलों में उन्होंने मुद्दे से बचने की कोशिश की। समिति ने 22 मार्च 2025 को उनके द्वारा दिए गए जवाब को भी असंतोषजनक पाया।

तीन सदस्यीय समिति द्वारा जांच

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार ने की थी। समिति में बॉम्बे हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य भी शामिल थे। गवाहों और दस्तावेजों की जांच के बाद समिति ने मई 2026 में लोकसभा अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंपी। अब इसे संसद में पेश किया गया है।

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साजिश का कोई सबूत नहीं मिला

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जस्टिस वर्मा के घर पर रखे कैश के मामले में किसी बाहरी साज़िश का कोई सबूत नहीं मिला। जस्टिस वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद उन्होंने 9 अप्रैल 2026 को जज के पद से इस्तीफा दे दिया। यह मामला न्यायिक पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही को लेकर काफ़ी चर्चा का विषय रहा है। संसद में रिपोर्ट पेश होने के साथ ही, जांच के नतीजे अब आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन गए हैं।

Location :  New Delhi

Published :  12 August 2026, 4:15 PM IST