कांफ्रेंस हॉल के बड़े-बड़े दावे… मैदान में होगी अग्निपरीक्षा, देवघर में उमड़ने वाले सैलाब के लिए क्या है फुल प्रूफ प्लान?

देवघर में श्रावणी मेला-2026 को लेकर झारखंड-बिहार के अधिकारियों की इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन बैठक हुई। करीब 55 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य पर संयुक्त रणनीति बनी। एसपी प्रवीण पुष्कर के मुताबिक 21 अस्थायी मेला ओपी बनेंगे, लेकिन पिछली अव्यवस्थाओं को देखते हुए असल परीक्षा धरातल पर होगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 4:31 PM IST

Deoghar: देवघर में विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला-2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रशासनिक बैठकों का दौर भी तेज हो गया है। शनिवार को परिसदन सभागार में झारखंड और बिहार समेत विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की इंटर स्टेट कोऑर्डिनेशन बैठक हुई। बैठक में सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा पर लंबी चर्चा हुई।

सबसे बड़ा सवाल वही है जो हर साल रहता है क्या यह बैठकें केवल फाइलों तक सीमित रहेंगी, या इस बार करोड़ों श्रद्धालुओं को सचमुच राहत मिलेगी? देवघर प्रशासन की अपनी वेबसाइट के अनुसार श्रावणी मेले के दौरान करीब 50 से 55 लाख श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। इतनी बड़ी भीड़ का प्रबंधन किसी भी प्रशासन के लिए आसान नहीं होता।

2025 की यादें अभी धुंधली नहीं 

पिछले वर्ष भी श्रावणी मेला शुरू होने से पहले लगभग यही तस्वीर थी। समीक्षा बैठकें हुईं, तैयारियों के दावे हुए, सुरक्षा के भरोसे दिए गए। सरकार ने लगभग 95 प्रतिशत तैयारियां पूरी होने का दावा भी किया था और 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान जताया था।

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जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, कई जगह लंबी कतारें, ट्रैफिक जाम, घंटों इंतजार, अस्पतालों पर दबाव और व्यवस्था को लेकर शिकायतें भी सामने आईं। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक ने सवाल उठाए कि आखिर हर साल वही परेशानियां क्यों दोहराई जाती हैं। यही वजह है कि इस बार प्रशासन के सामने चुनौती केवल मेला कराना नहीं, बल्कि भरोसा जीतना भी है।

बैठक में क्या हुआ

शनिवार की इंटर स्टेट बैठक में झारखंड और बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सूचना का त्वरित आदान-प्रदान, ट्रैफिक कंट्रोल, मेडिकल इमरजेंसी और कानून-व्यवस्था पर संयुक्त रणनीति बनाई गई। प्रशासन का दावा है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त तंत्र सक्रिय रहेगा।

एसपी का फोकस साफ

देवघर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर पहले ही विभिन्न समीक्षा बैठकों में स्पष्ट कर चुके हैं कि इस बार प्राथमिकता भीड़ नियंत्रण, सुगम जलार्पण, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन होगी। पुलिस की योजना के तहत 21 अस्थायी मेला ओपी तथा 13 अस्थायी ट्रैफिक ओपी संचालित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि भीड़ और यातायात को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

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भागलपुर की भूमिका क्यों अहम है?

श्रद्धालुओं की यात्रा बिहार के सुल्तानगंज से शुरू होकर देवघर तक लगभग 105-109 किलोमीटर की होती है। इसलिए भागलपुर और देवघर प्रशासन का समन्वय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

बैठक में भागलपुर पुलिस एवं प्रशासन ने भी सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा, सूचना साझा करने और संयुक्त कार्रवाई पर सहमति जताई। हालांकि बैठक के बाद *पुलिस आयुक्त प्रेम कुमार मीणा* का विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों राज्यों ने निर्बाध यातायात और सुरक्षा समन्वय पर जोर दिया।

दावे बड़े हैं, लेकिन परीक्षा मैदान में होगी

इस बार प्रशासन जिन व्यवस्थाओं का दावा कर रहा है, उनमें एआई आधारित इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम, अतिरिक्त सीसीटीवी निगरानी, बेहतर बैरिकेडिंग, कांवरिया पथ पर सुविधाएं, मिस्ट कूलिंग सिस्टम, अस्थायी पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और बेहतर ट्रैफिक प्लान शामिल हैं। इन तैयारियों के लिए टेंडर और कार्यादेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। लेकिन सवाल फिर वही है - क्या यह सारी व्यवस्था पहले सोमवार को आने वाली भारी भीड़ का दबाव झेल पाएगी?, क्या श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ेगा?, क्या अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और एम्बुलेंस उपलब्ध रहेंगी?, क्या ट्रैफिक प्लान जाम से राहत देगा? और सबसे बड़ा सवाल क्या इस बार व्यवस्था श्रद्धालुओं के अनुभव से मापी जाएगी या फिर केवल प्रेस विज्ञप्तियों से?

श्रद्धालुओं की उम्मीद सिर्फ दर्शन नहीं

श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। यह झारखंड सरकार की प्रशासनिक क्षमता की सबसे बड़ी परीक्षा भी है। लाखों लोग सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर बाबा धाम पहुंचते हैं। उन्हें केवल दर्शन नहीं चाहिए, बल्कि सुरक्षित यात्रा, साफ-सफाई, पीने का पानी, समय पर इलाज और सम्मानजनक व्यवस्था भी चाहिए।

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इंटर स्टेट बैठक ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन पिछले वर्षों का अनुभव यह भी बताता है कि असली परीक्षा कॉन्फ्रेंस हॉल में नहीं, बल्कि उस दिन होगी जब भगवा वस्त्रों में लाखों कांवरियों का सैलाब देवघर की सड़कों पर उतरेगा। तभी तय होगा कि श्रावणी मेला-2026 बैठकों का सफल आयोजन था या फिर व्यवस्थाओं का भी।

Location :  Deoghar

Published :  4 July 2026, 4:31 PM IST