मिशन कर्मयोगी के तहत एक राष्ट्रीय शिक्षण पहल, ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य देशभर के सरकारी कर्मचारियों की क्षमताओं, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत करना है।

दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम का शुभारंभ करते डॉ पीके मिश्रा
New Delhi: भारत सरकार ने 'मिशन कर्मयोगी' के तहत 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' नामक एक राष्ट्रीय शिक्षण पहल का शुभारंभ किया। 2 से 8 अप्रैल तक चलने वाला यह कार्यक्रम सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के अनुरूप उन्हें आधुनिक कौशल (AI, तकनीक) से लैस करने पर केंद्रित है। यह 'मिशन कर्मयोगी' के पांच साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जो सरकारी कामकाज में नियम-आधारित दृष्टिकोण से योग्यता-आधारित दृष्टिकोण की ओर एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव है। इसका "नागरिक देवो भव" की भावना के साथ सरकारी सेवाओं को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। इस दौरान 'कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट' और 'एआई-संचालित अमृत ज्ञान कोष' जैसी पहलों का अनावरण किया गया। यह पहल iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से सतत सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देती है।
'कर्मयोगी साधना सप्ताह' का उद्घाटन नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में किया गया। यह आयोजन 'मिशन कर्मयोगी' के पाँच वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया है। राष्ट्रव्यापी क्षमता-निर्माण के प्रयास के रूप में परिकल्पित यह पहल, विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा शिक्षण ढांचे के अंतर्गत एक साथ लाती है। यह कार्यक्रम तीन मुख्य स्तंभों प्रौद्योगिकी, परंपरा और ठोस परिणामों पर आधारित है। इसमें भविष्य के लिए तैयार शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कार्यशालाओं, मास्टरक्लास और संस्थागत विचार-विमर्श जैसे केंद्रित कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। उद्घाटन सत्र में देश भर से वरिष्ठ अधिकारियों, मंत्रालयों, विभागों, प्रशिक्षण संस्थानों, राज्यों के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान क्षमता निर्माण आयोग के सदस्य और 'कर्मयोगी भारत' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में शुभकामनाएं दीं और इस बात पर जोर दिया कि तेजी से बदलती दुनिया में शासन को बदलती जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए, जो "नागरिक देवो भव" की भावना से प्रेरित हो। उन्होंने निरंतर सीखने, निर्णय लेने में प्रौद्योगिकी और डेटा के अधिक उपयोग और कर्तव्य-उन्मुख सार्वजनिक सेवा की ओर बदलाव का आह्वान किया, क्योंकि भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
Governance requires new capabilities to respond to technological disruption: Dr PK Mishra#pkmishra #governance @PMOIndia https://t.co/skU5VaNcl7
— Dynamite News (@DynamiteNews_) April 3, 2026
पीएम ने यह भी कहा कि, 'कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम' एक राष्ट्रीय व्यवहार प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 'सेवा भाव' को बढ़ावा देकर लोक सेवा की भावना में बदलाव लाना है। लगभग 1.3 करोड़ अधिकारियों, विशेष रूप से जमीनी स्तर के कर्मियों को लक्षित करते हुए, यह कार्यक्रम संवेदनशीलता और जवाबदेही विकसित करने के लिए डिजिटल शिक्षण, व्यक्तिगत प्रशिक्षण और समूह चर्चाओं के एक मिश्रित दृष्टिकोण को अपनाता है।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि, आज के समय में शासन-प्रशासन को तकनीकी बदलावों, जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए नई क्षमताओं की ज़रूरत है। उन्होंने आगे कहा कि लगातार सीखते रहने से नवाचार, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और पेशेवर रवैया मज़बूत होता है, प्रभावी लोक सेवा के लिए सही सोच और संवेदनशील होना बेहद ज़रूरी है। 'साधना सप्ताह' एक सक्षम, समर्पित और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की ओर हो रहे बदलाव को और मज़बूत करता है।
उन्होंने बताया कि क्षमता निर्माण अब केवल सीमित और नियमों पर आधारित प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘आइगोट’ जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से यह एक निरंतर चलने वाली और 'कभी भी-कहीं भी' सीखने की प्रणाली में बदल गया है। उन्होंने नियमों पर आधारित शासन से भूमिका आधारित शासन की ओर हो रहे बदलाव पर ज़ोर दिया, जिसमें योग्यता, व्यवहार और सेवा-भाव को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाता है। देश भर के प्रशिक्षण संस्थानों को आपस में जोड़ने का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'क्षमता निर्माण आयोग' ने इस पूरे तंत्र में एकरूपता और व्यापकता लाने का काम किया है।