EPFO का बड़ा फैसला: अब 1800 रुपय से ज्यादा पीएफ कटना अनिवार्य नहीं, जानिए क्या है नया नियम

EPFO ने पीएफ नियमों को पूरी तरह बदल दिया है! अब 15,000 रुपय से अधिक वेतन पर 1800 रुपय से ज्यादा की कटौती अनिवार्य नहीं होगी। इसके अलावा, पैसे निकालने की प्रक्रिया में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। जानिए इस नए फैसले से आपकी इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी या घटेगी और क्या हैं निकासी के नए नियम?

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 2 July 2026, 8:47 AM IST

New Delhi: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड (PF) के योगदान और निकासी से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत, कानूनी वेतन सीमा (जो वर्तमान में 15,000 रुपय प्रति माह है) तक ही 12% का अनिवार्य पीएफ योगदान देना होगा। इसके अतिरिक्त किया जाने वाला कोई भी योगदान पूरी तरह से कर्मचारियों की इच्छा (स्वैच्छिक) पर निर्भर करेगा। 'एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026' के इन नए प्रावधानों का उद्देश्य सब्सक्राइबर्स को अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स के प्रबंधन में अधिक आजादी देना है।

अनिवार्य और स्वैच्छिक योगदान के नए नियम

नए प्रावधानों के अनुसार, अनिवार्य पीएफ कटौती के लिए वेतन की कानूनी सीमा 15,000 रुपय तय है। इसका मतलब है कि यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 1 लाख रुपय प्रति माह भी है, तब भी अनिवार्य रूप से केवल 1,800 रुपय ही पीएफ के तौर पर काटे जाएंगे। नियोक्ता (Employer) भी इस राशि के बराबर ही योगदान देगा।

यदि कोई कर्मचारी अपनी बची हुई सैलरी में से रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत करना चाहता है, तो वह कानूनी दर या उससे अधिक दर पर स्वैच्छिक आधार पर अतिरिक्त योगदान का विकल्प चुन सकता है। नियोक्ता के पास इस अतिरिक्त योगदान के बराबर पैसे जमा करने का विकल्प होगा, लेकिन उनके लिए ऐसा करना कोई मजबूरी नहीं है। खास बात यह है कि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों ही किसी भी समय इस अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान को कम या बंद कर सकते हैं।

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बदलेगा प्राइवेट कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर

निजी क्षेत्र (Private Sector) के अधिकांश कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच 'कॉस्ट-टू-कंपनी' (CTC) मॉडल पर काम होता है। नियमों में इस बदलाव के कारण कंपनियों को अपने कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर बदलना पड़ सकता है। इससे दोनों पक्ष मिलकर एक ऐसी नई व्यवस्था बना सकते हैं जो ईपीएफओ सब्सक्राइबर के लिए अधिक फायदेमंद और व्यावहारिक हो। हालांकि, कवरेज से जुड़े पुराने नियम जारी रहेंगे और जो कर्मचारी पहले से पुरानी स्कीम के सदस्य थे, वे आगे भी सदस्य बने रहेंगे।

निकासी की प्रक्रिया हुई आसान, 13 से घटकर रह गईं 3 कैटेगरी

ईपीएफओ ने सदस्यों की सहूलियत के लिए पीएफ से पैसे निकालने (विड्रॉल) की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। पहले जहां पैसे निकालने के लिए 13 अलग-अलग श्रेणियां (Categories) हुआ करती थीं, उन्हें अब घटाकर सिर्फ 3 कर दिया गया है। ये तीन श्रेणियां हैं-

जरूरी जरूरतें: जैसे बीमारी, पढ़ाई और शादी ब्याह।

घर से जुड़ी जरूरतें: मकान खरीदना या निर्माण।

खास हालात: अन्य आपातकालीन परिस्थितियां।

इन बदलावों को पिछले साल अक्टूबर में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में मंजूरी दी गई थी, जिन्हें अब नए लेबर कोड्स के उद्देश्यों के अनुरूप लागू किया जा रहा है। इसके तहत अब सदस्य एक साल में पहले से अधिक बार पैसे निकाल सकेंगे।

100% एडवांस निकालने की मंजूरी, लेकिन रखना होगा मिनिमम बैलेंस

नए नियमों में ईपीएफओ ने पीएफ खाते में जमा 'एलिजिबल बैलेंस' (जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा शामिल है) का 100% तक एडवांस निकालने की अनुमति दे दी है। हालांकि, सदस्यों को अब अपने खाते में कुल कॉन्ट्रिब्यूशन का कम से कम 25% हिस्सा 'मिनिमम बैलेंस' के रूप में हमेशा बनाए रखना होगा।

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कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी तय

नई स्कीम में कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) पर काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए 'प्रिंसिपल एम्प्लॉयर' (मुख्य नियोक्ता) की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। यदि कोई कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदार) ईपीएफओ में अलग से रजिस्टर्ड नहीं है, तो उसके जरिए रखे गए कर्मचारियों के पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन का भुगतान सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी।

नियोक्ताओं के लिए कड़े कप्लायंस और फाइलिंग नियम

नियोक्ताओं के लिए नियमों के पालन (कंप्लायंस) और फाइलिंग को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अब हर नियोक्ता के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह इस नई स्कीम के लागू होने के 15 दिनों के भीतर 'फॉर्म V' में एक कंबाइंड रिटर्न फाइल करे। इस रिटर्न में कंपनी के सभी कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी देनी होगी, जिसमें उनका (आधार ओमिटेड), पैन (PAN), यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), ग्रॉस वेज और ईपीएफ वेज शामिल हैं। इसके अलावा नियोक्ताओं को हर महीने और विशेष घटनाओं पर भी कंप्लायंस नियमों का पालन करना होगा।

Location :  New Delhi

Published :  2 July 2026, 8:47 AM IST