देशभर में आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। मजदूर संगठनों ने नए श्रम कानूनों, रोजगार सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और किसान हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया।

क्या कोई भी कर सकता है भारत बंद का ऐलान?
New Delhi: देशभर में आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। मजदूर संगठनों ने नए श्रम कानूनों, रोजगार सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और किसान हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में रैलियां, धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी हुई, जबकि कुछ राज्यों में बैंकिंग, परिवहन और सरकारी सेवाओं पर आंशिक प्रभाव दर्ज किया गया।
भारत बंद का ऐलान देश की 10 बड़ी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने किया, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा और विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। संगठनों का आरोप है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए चार नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और नौकरी की सुरक्षा घटाते हैं। इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना की बहाली, न्यूनतम वेतन की गारंटी और रोजगार योजनाओं को मजबूत करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
भारत बंद का प्रभाव राज्यों में अलग-अलग स्तर पर रहा। केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार के कई हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन और बाजार गतिविधियाँ प्रभावित रहीं। कुछ स्थानों पर बैंकिंग सेवाएँ धीमी पड़ीं और सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति कम रही। वहीं दिल्ली-एनसीआर, झारखंड और कुछ अन्य राज्यों में जनजीवन सामान्य के करीब रहा, हालांकि प्रदर्शन जारी रहे। कुल मिलाकर बंद का असर मिला-जुला माना जा रहा है।
हड़ताल के चलते कई सार्वजनिक सेवाओं पर असर देखा गया कुछ क्षेत्रों में सरकारी बैंक और दफ्तरों का कामकाज प्रभावित हुआ। राज्य परिवहन बस सेवाएं कई जगह आंशिक रूप से बाधित रहीं।बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी बंद का असर दिखा। हालांकि अस्पताल, आपातकालीन सेवाएँ, पुलिस, बिजली-पानी आपूर्ति और हवाई सेवाएँ सामान्य रूप से संचालित होती रहीं, जिससे आम नागरिकों को बड़ी परेशानी नहीं हुई।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में मजदूर संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने एकत्र होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, बेहतर वेतन संरचना और श्रम कानूनों में संशोधन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दिया और सरकार से वार्ता की अपील की।
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संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, इसलिए शांतिपूर्ण भारत बंद पर सामान्यतः कार्रवाई नहीं होती। लेकिन यदि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़, जबरन दुकान बंद कराना या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो संबंधित कानूनों के तहत गिरफ्तारी, जुर्माना और जेल की सजा तक हो सकती है। कई राज्यों में ऐसे मामलों में नुकसान की भरपाई भी प्रदर्शनकारियों से वसूलने का प्रावधान है।
आज का भारत बंद मुख्य रूप से मजदूर-किसान मुद्दों पर केंद्रित रहा और देशभर में इसका आंशिक लेकिन व्यापक प्रतीकात्मक प्रभाव दिखाई दिया। जहां कुछ राज्यों में सेवाएँ बाधित रहीं, वहीं कई जगह सामान्य जनजीवन जारी रहा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच संवाद से इन मुद्दों का क्या समाधान निकलता है।