दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल: नए ट्रैफिक चालान नियमों के विरोध में कामकाज ठप

दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में बदलाव और नए चालान निपटारा नियमों के विरोध में आज कामकाज का पूरी तरह बहिष्कार कर रहे हैं। इस हड़ताल के तहत वकील न तो कोर्ट में पेश होंगे और न ही ऑनलाइन पैरवी करेंगे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 September 2026, 7:56 AM IST

New Delhi: राजधानी दिल्ली के न्यायिक परिसरों में आज कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहने वाला है। दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील आज एक दिन की हड़ताल पर हैं। इस दौरान वकील अदालती कार्रवाइयों से पूरी तरह दूर रहेंगे और किसी भी तरह की पैरवी में हिस्सा नहीं लेंगे। विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप देने के लिए सुबह 11:30 बजे सभी जिला अदालतों के परिसरों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया गया है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन सुनवाई का पूर्ण बहिष्कार

वकीलों की इस हड़ताल का असर अदालतों के रोजमर्रा के कामकाज पर साफ तौर पर दिखाई देगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वकील न तो कोर्ट रूम में होने वाली प्रत्यक्ष (फिजिकल) सुनवाई में शामिल होंगे और न ही किसी वर्चुअल या ऑनलाइन माध्यम से अपनी दलीलें रखेंगे। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकार तक अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराना है ताकि आम जनता और न्यायिक व्यवस्था के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

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विरोध की मुख्य वजह: ट्रैफिक चालान के नए नियम

इस विरोध प्रदर्शन के पीछे केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 में किए गए बदलाव और दिल्ली सरकार द्वारा लाए गए नए चालान निपटारा नियम हैं। जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के महासचिव नरवीर डबास ने इन बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। समिति का स्पष्ट मानना है कि ये नए नियम किसी भी सूरत में आम नागरिकों के हित में नहीं हैं।

न्यायिक अधिकारों में कटौती पर वकीलों की चिंता

वकीलों और समन्वय समिति का मुख्य तर्क यह है कि ट्रैफिक चालान के निपटारे का अधिकार अब तक न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास था। लेकिन नए नियमों के तहत इस अधिकार को मजिस्ट्रेट से हटाकर एसडीएम और अन्य विभागीय अधिकारियों को सौंप दिया गया है।

वकीलों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह शक्ति देना न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करने जैसा है। इससे अदालतों की भूमिका सीमित होगी और नागरिकों के निष्पक्ष न्याय पाने के अधिकार पर सीधा असर पड़ेगा।

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आगे की चेतावनी और सरकार से मांग

समिति ने सरकार से मांग की है कि वह इन विवादित नियमों पर तुरंत पुनर्विचार करे और इन्हें वापस ले। साथ ही, वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन नियमों को निरस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

Location :  New Delhi

Published :  21 September 2026, 7:56 AM IST