चाईबासा कोर्ट का बड़ा फैसला: अफीम की खेती करने वाले दो तस्करों को 5-5 साल की जेल!

चाईबासा की अदालत ने टोंटो क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती और व्यापार करने के मामले में दो दोषियों, सुरजा दुराईबुरू और गर्दी सुंडी को 5-5 साल की जेल और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने यह फैसला एनडीपीएस एक्ट के तहत दिया है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 June 2026, 1:54 PM IST

Chaibasa: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नशीले पदार्थों के काले कारोबार और अफीम (पोस्ता) की अवैध खेती करने वाले अपराधियों के खिलाफ कानून का बड़ा डंडा चला है। चाईबासा की एक विशेष अदालत ने अफीम की खेती और उसके अंतरराज्यीय अवैध व्यापार के एक गंभीर मामले में शनिवार को दो मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही माननीय अदालत ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का नकद आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में इन्हें अतिरिक्त जेल काटनी होगी। यह पूरा मामला टोंटो थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

सालों पुराना वो खूनी और नशीला खेल

दरअसल, यह पूरा मामला साल 2020 का है। टोंटो थाना पुलिस ने 19 मार्च 2020 को गुप्त सूचना के आधार पर बड़ा कूचियां गांव के जंगलों में छापेमारी की थी, जहां बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती की जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने जाल बिछाकर सुरजा दुराईबुरू (पिता सुलूप दुराईबुरू) और गर्दी सुंडी (पिता स्वर्गीय भेंगरा सुंडी) को रंगेहाथ दबोचा था। दोनों के खिलाफ टोंटो थाना कांड संख्या 06/2020 के तहत एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई थी।

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वैज्ञानिक साक्ष्यों के आगे ढेर हुए अफीम के कारोबारी

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चाईबासा पुलिस ने जांच के दौरान पारंपरिक गवाहों के अलावा वैज्ञानिक तरीकों और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया था, ताकि अदालत में पोस्ता की खेती को अकाट्य रूप से साबित किया जा सके। पुलिस ने समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। एनडीपीएस केस संख्या 06/2021 के तहत चली लंबी सुनवाई के बाद, शनिवार 20 जून 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विनोद कुमार सिंह की अदालत ने दोनों को धारा 18(सी) एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाया और जेल की सलाखों के पीछे भेजने का फरमान सुना दिया।

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नक्सली फंडिंग का एंगल और खूंटी-ओडिशा कनेक्शन

 पुलिस की गुप्त फाइलों और जांच डायरी के मुताबिक, पकड़े गए दोनों दोषी स्थानीय स्तर पर अफीम उगाकर उसकी तस्करी खूंटी जिला और पड़ोसी राज्य ओडिशा के रास्ते पंजाब-हरियाणा तक करते थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि इस अफीम की खेती से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को लेवी (फंडिंग) के रूप में जाता था, जिससे वे सुरक्षा बलों के खिलाफ हथियार खरीदते थे।

Location :  Chaibasa

Published :  20 June 2026, 1:54 PM IST