पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान में हुए एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक हुई। बैठक में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, यात्रियों और छात्रों पर असर तथा आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा की गई।

CCS की मीटिंग में हुए बड़े फैसले
New Delhi: पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय समीक्षा की। 1 मार्च 2026 की शाम प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस बैठक में 28 फरवरी को ईरान में हुए एयर स्ट्राइक और उसके बाद भड़की हिंसा की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद कई खाड़ी देशों में भी हमलों और अस्थिरता की खबरें सामने आई हैं। CCS ने इन घटनाओं को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।
समिति ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में रह रहे बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। इस क्षेत्र में लाखों भारतीय कामकाजी और पेशेवर कारणों से निवास करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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बैठक में उन भारतीय यात्रियों की स्थिति की भी समीक्षा की गई, जो वर्तमान हालात के कारण प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही उन छात्रों के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिनकी निर्धारित परीक्षाएं या शैक्षणिक गतिविधियां इस क्षेत्र में होनी हैं। उड़ानों में संभावित व्यवधान, वीजा संबंधी कठिनाइयां और सुरक्षा जोखिम जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
CCS ने माना कि मौजूदा तनाव का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और वित्तीय बाजारों पर संभावित दबाव को लेकर भी सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई।
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बैठक के अंत में CCS ने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया कि वे प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और संभव सभी कदम उठाएं। विदेश मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और अन्य एजेंसियों को समन्वय बढ़ाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सक्रिय रखने को कहा गया है।
सरकार ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा दुश्मनी और सैन्य टकराव को जल्द समाप्त किया जाना चाहिए। समिति ने संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने के महत्व को रेखांकित करते हुए क्षेत्रीय शांति बहाली की अपील की।