फर्जी ST सर्टिफिकेट पर 30 साल नौकरी, रिटायरमेंट के बाद आया बड़ा फैसला; अब भी मिलेगी पेंशन!

Supreme Court Fake ST Certificate Case में मुंबई के इंजीनियर शिरीष पी. पाटिल को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके ST प्रमाण पत्र को अमान्य माना, लेकिन 30 साल से अधिक की सेवा देखते हुए पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ सुरक्षित रखे। प्रशासन को छह महीने में भुगतान करने का निर्देश दिया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 5 September 2026, 10:30 AM IST

Mumbai: फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर करीब 30 साल तक सरकारी नौकरी करने वाले मुंबई के एक इंजीनियर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके ST प्रमाण पत्र के दावे को सही नहीं माना, लेकिन लंबी सेवा को देखते हुए उनकी पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इसके लिए कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया।

30 साल से ज्यादा की नौकरी का पूरा मामला

यह मामला शिरीष पी. पाटिल से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 1994 में बृहन्मुंबई नगर निगम (MCGM) में 'टोकरे कोली' अनुसूचित जनजाति (ST) कोटे के तहत जूनियर सिविल इंजीनियर के पद पर नौकरी हासिल की थी। पाटिल ने इस पद पर 30 साल से अधिक समय तक सेवा दी और 30 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए।

जांच में ST प्रमाण पत्र हुआ अमान्य

पाटिल के ST प्रमाण पत्र की जांच होने के बाद स्क्रूटनी कमेटी ने उनके अनुसूचित जनजाति के दावे को अमान्य घोषित कर दिया था। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा, जहां भी उनके दावे को मान्य नहीं माना गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस निष्कर्ष को बरकरार रखा और माना कि उनका ST प्रमाण पत्र वैध नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने फिर क्यों दी पेंशन की राहत?

Supreme Court Fake ST Certificate Case में सबसे अहम बात यह रही कि अदालत ने प्रमाण पत्र को वैध नहीं माना, लेकिन पाटिल की लंबी सेवा और परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय आधार पर पेंशन और रिटायरमेंट लाभ सुरक्षित रखने का फैसला किया।

पाटिल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि उनका कोई बच्चा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य ने इस अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर कोई लाभ नहीं लिया है।

भविष्य में परिवार नहीं करेगा कोई दावा

पाटिल ने अदालत को यह भी अंडरटेकिंग दी कि भविष्य में उनके परिवार का कोई सदस्य इस अमान्य ST प्रमाण पत्र के आधार पर किसी लाभ का दावा नहीं करेगा। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उन्हें सीमित राहत प्रदान की।

ST दर्जे को नहीं मिली मान्यता

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों की सुरक्षा का यह आदेश उनके ST दर्जे को मान्यता देने के बराबर नहीं है। यानी अदालत ने उनके प्रमाण पत्र को वैध नहीं माना है। राहत केवल उनकी लंबी सेवा और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है।

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छह महीने में देना होगा रिटायरमेंट लाभ

अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि पाटिल के सेवानिवृत्ति लाभों की गणना कर छह महीने के भीतर उनका भुगतान किया जाए। इस फैसले के साथ Supreme Court Fake ST Certificate Case में एक तरफ फर्जी प्रमाण पत्र के दावे को खारिज किया गया, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय तक सेवा कर चुके कर्मचारी को पेंशन संबंधी राहत दी गई।

Location :  Mumbai

Published :  5 September 2026, 10:30 AM IST