महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में से 26 में अब तक बीजेपी आगे चल रही है। शुरुआती रुझानों में बीजेपी को स्पष्ट बढ़त मिली है, जिसे पार्टी के लिए जनता के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
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महाराष्ट्र की राजनीति के लिए मिनी विधानसभा कहे जाने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव की मतगणना आज हो रही है। यह चुनाव सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। खासतौर पर BMC समेत बड़े शहरों के नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव
भिवंडी में शरद पवार गुट को शुरुआती सफलता मिली है। अब तक गुट के 4 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर ली है, जिससे चुनावी मैदान में उनकी मौजूदगी दर्ज हो गई है।
महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में से 26 में अब तक बीजेपी आगे चल रही है। शुरुआती रुझानों में बीजेपी को स्पष्ट बढ़त मिली है, जिसे पार्टी के लिए जनता के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
पुणे में कांग्रेस उम्मीदवार प्रशांत जगताप ने चुनाव जीत लिया है। अजित पवार के साथ चुनाव लड़ने के फैसले से नाराज़ होकर उन्होंने शरद पवार से दूरी बनाई और कांग्रेस का दामन थामा था। इससे पहले वह शरद पवार गुट में पुणे शहर के पदाधिकारी रहे हैं।
वसई-विरार में वंचित विकास अघाड़ी की लहर देखने को मिल रही है। कोल्हापुर में कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है और बीजेपी दूसरे नंबर पर है। सोलापुर में कांग्रेस सबसे आगे चल रही है। वहीं लातूर में कांग्रेस ने सभी दलों को पीछे छोड़ दिया है।
महाराष्ट्र बीएमसी चुनाव 2026 की काउंटिंग जारी है। शुरुआती रुझानों में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति 68 सीटों पर आगे है। शिवसेना (UBT)–MNS गठबंधन 51 सीटों पर सिमटा है, जबकि कांग्रेस 11 सीटों तक सीमित नजर आ रही है। मुंबई के 227 वार्डों में करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में हैं।
अमरावती में डाक मतपत्रों के पहले चरण की गिनती में बीजेपी 7 सीटों के साथ आगे चल रही है। अजित पवार की एनसीपी को 5 और कांग्रेस को 3 सीटें मिली हैं। युवा स्वाभिमान ने 2 सीटें जीतीं, जबकि अन्य दलों का खाता अभी नहीं खुला है।
Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जाने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनावी दंगल का आज निर्णायक दिन है। गुरुवार को शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न होने के बाद शुक्रवार को मतगणना की प्रक्रिया जारी है। इन चुनावों को “मिनी विधानसभा चुनाव” भी कहा जाता है, क्योंकि इसके नतीजे राज्य की सियासत की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
यह चुनाव न केवल स्थानीय निकायों के भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए अपनी जमीनी ताकत साबित करने की अग्निपरीक्षा भी है। दोनों ही गठबंधन इसे आगामी विधानसभा और लोकसभा राजनीति के संकेतक के रूप में देख रहे हैं।
सबसे ज्यादा नजर देश की सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नतीजों पर है। बीएमसी पर पिछले दो दशकों से अधिक समय तक शिवसेना का दबदबा रहा है, लेकिन पार्टी में विभाजन के बाद यह पहला मौका है जब मतदाताओं ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच अपना फैसला सुनाया है। बीएमसी के परिणाम यह साफ करेंगे कि मुंबई का शहरी मतदाता किस खेमे पर भरोसा जता रहा है।
इसके अलावा पुणे, नागपुर, नासिक, ठाणे और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसी प्रमुख महानगरपालिकाओं के नतीजे भी बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन शहरों के परिणाम यह संकेत देंगे कि शहरी मतदाता विकास, बुनियादी सुविधाओं और शासन के मुद्दों पर किस राजनीतिक दल के साथ खड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं। मतगणना के साथ ही राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सभी दलों की नजर अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है।