अब सरकारी दफ्तरों में मराठी-अंग्रेजी का दबदबा: महाराष्ट्र कर्मचारियों को हिंदी परीक्षा से मिली छूट, जानें कब से लागू नियम

महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा परीक्षा को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। यह फैसला 7 मई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। जानिए मराठी और अंग्रेजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सरकार ने क्यों लिया यह अहम निर्णय।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 2 September 2026, 10:09 AM IST

Mumbai: महाराष्ट्र के प्रशासनिक तंत्र में एक बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को औपचारिक रूप से पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कामकाज में मराठी भाषा ही सर्वोपरि है और पत्राचार में हिंदी की आवश्यकता न के बराबर रह गई है।

मराठी भाषा विभाग ने जारी किया आधिकारिक आदेश

मराठी भाषा विभाग की ओर से 31 अगस्त को एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया गया, जिस पर डेस्क ऑफिसर वैशाली लाहू वाघमारे ने डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस आदेश के तहत भाषा निदेशालय द्वारा आयोजित की जाने वाली हिंदी परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। साथ ही परीक्षा से जुड़े सभी पुराने आदेश, परिपत्र और नियम भी अब निष्प्रभावी घोषित कर दिए गए हैं।

7 मई 2026 से पिछली तारीख से प्रभावी होगा नियम

इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि इसे 7 मई 2026 की पिछली तारीख (बैकडेट) से लागू माना जाएगा। दरअसल, इसी दिन से राज्य में हिंदी परीक्षा पर रोक लगाई गई थी। आजादी के समय बॉम्बे प्रांत की सरकार ने सरकारी कामकाज में सहूलियत के लिए यह परीक्षा अनिवार्य की थी, लेकिन अब महाराष्ट्र बनने के दशकों बाद इसे अप्रासंगिक मानते हुए खत्म कर दिया गया है।

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अंग्रेजी और मराठी का बढ़ा वर्चस्व

सरकार ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र आधिकारिक भाषा अधिनियम के तहत राज्य के भीतर का सारा कामकाज मराठी में होता है। वहीं, केंद्र सरकार या अन्य राज्यों के साथ संपर्क साधने के लिए मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में हिंदी परीक्षा का औचित्य समाप्त हो चुका था।

Location :  Mumbai

Published :  2 September 2026, 10:09 AM IST