मधुमक्खियों के हमले में कंचन देवी को नहीं मिल रहा इंसाफ, दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार, प्रशासन क्यों है मौन?

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Post Published By: Tanya Chand
Updated : 7 February 2026, 1:50 PM IST

Neemuch: मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रामपुरा गांव की 55 वर्षीय आंगनबाड़ी सहायिका कंचन देवी मेघवाल ने 2 फरवरी 2026 को अद्भुत साहस का परिचय देते हुए लगभग 25 बच्चों की जान बचाई। दोपहर लगभग 3:30 बजे आंगनबाड़ी परिसर में मधुमक्खियों के झुंड ने हमला किया, तभी कंचन बाई ने तुरंत बच्चों को अंदर सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने दरियां, कंबल और अपनी साड़ी का इस्तेमाल कर बच्चों को ढक दिया।

परिवार आज भी इंसाफ के इंतजार में

कंचन बाई के इस शौर्यपूर्ण कदम के बाद उनकी मौत हो गई। उनके पैरालिसिस पीड़ित पति और बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बावजूद इसके प्रशासन ने अभी तक परिवार को उचित सहायता, आर्थिक मदद या सम्मान नहीं दिया। परिवार आज भी न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है।

स्थानीय प्रशासन की उदासीनता पर रोष

कंचन बाई के सम्मान और परिवार की मांगों को लेकर मेघवाल समाज के लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने 1 करोड़ रुपये की सहायता, वीरता सम्मान, अनुकंपा नियुक्ति और महिला बाल विकास अधिकारी आभा पांडे के तत्काल निलंबन की मांग की।

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जब ज्ञापन देने के लिए अपर कलेक्टर बीएल क्लेश और डिप्टी कलेक्टर चंद्र सिंह धार्वे पहुंचे, तो समाजजन नाराज हो गए और कलेक्टर के मौके पर न आने पर “कंचन बाई को न्याय दो” और “कलेक्टर होश में आओ” के नारों से परिसर गूंज उठा।

कलेक्टर के रवैये से बढ़ा आक्रोश

समाजजन जोर देकर चाहते थे कि कलेक्टर स्वयं घटनास्थल आकर परिवार से मिलें। एक घंटे बीत जाने के बावजूद कलेक्टर के न पहुंचने से लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया। ज्ञापन में साफ लिखा गया कि कंचन बाई ने मातृत्व और वीरता का अनमोल उदाहरण पेश किया, लेकिन प्रशासन की उदासीनता परिवार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।

ग्रामीणों का बयान

गांव और समाज में गहरा असर

रामपुरा का यह आंगनबाड़ी परिसर आमतौर पर बच्चों की हँंसी और शरारतों से भरा रहता है। लेकिन मधुमक्खियों के हमले और कंचन बाई की शहादत ने पूरे गांव और आस-पास के इलाकों में गहरा सदमा दिया। मेघवाल समाज का कहना है कि प्रशासन द्वारा उचित सम्मान और सहायता न देना परिवार के प्रति अन्याय है।

मांगें न्याय और सहायता की

समाजजन परिवार के लिए न्याय, वित्तीय मदद और उचित सरकारी सम्मान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कंचन बाई ने अपने प्राणों की आहुति देकर बच्चों की जान बचाई, ऐसे में प्रशासन का मौन और अनदेखी परिवार के लिए अपमानजनक है।

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कंचन बाई की वीरता ने 25 बच्चों को मौत से बचाया, लेकिन उनके परिवार के लिए न्याय और सहायता अभी भी दूर की कौड़ी है। यह मामला सिर्फ एक बलिदान की कहानी नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और न्याय की उपलब्धता पर सवाल भी खड़ा करता है।

Location : 
  • Neemuch

Published : 
  • 7 February 2026, 1:50 PM IST