
फ्रेंडशिप टूटने की असली वजह (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: जिंदगी का एक ऐसा दौर, जहां स्कूल और कॉलेज की बेफिक्र हंसी धीरे-धीरे दफन होने लगती है और सामने खड़ी होती है जिम्मेदारियों की बड़ी दीवार। जी हां, हम बात कर रहे हैं 25 की उस उम्र की, जिसे पार करते ही दोस्ती के समीकरण पूरी तरह बदलने लगते हैं। आज के युवाओं के लिए इस पड़ाव पर नए दोस्त बनाना किसी पहाड़ चढ़ने से कम नहीं है, जबकि पुराने यार-दोस्तों का साथ छूट जाना एक आम हकीकत बन चुका है। आखिर क्या वजह है कि इस उम्र में 'एडल्ट फ्रेंडशिप' इतनी जटिल हो जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी असलियत।
भारतीय समाज में जहां 25 की उम्र को अमूनन शादी के लिए सबसे सही वक्त मान लिया जाता है, वहीं आज का युवा इस पड़ाव पर अपने करियर और सपनों को उड़ान देने के लिए संघर्ष कर रहा होता है। परिवार और समाज का बढ़ता दबाव इंसान को दुनियादारी से दूर कर देता है। इस समय हर कोई अपने लक्ष्यों को पाने की अंधी दौड़ में शामिल होता है, जिसके चलते आपसी मेल-जोल और मुलाकातों का सिलसिला अपने आप थम जाता है।
स्कूल और कॉलेज के दिनों में सिर पर कोई बोझ नहीं होता, इसलिए दोस्ती निभाना आसान होता है। लेकिन 25 के बाद जिंदगी का दायरा बदल जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जिम्मेदारियां भी पहाड़ जैसी सामने आने लगती हैं, खासकर अगर कम उम्र में ही शादी जैसी बड़ी जिम्मेदारी कंधे पर आ जाए। अपनी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए इंसान दिन-रात मेहनत में जुट जाता है, जिससे रिश्तों के लिए वक्त निकालना नामुमकिन सा हो जाता है।
पूरे हफ्ते की भागदौड़ और ऑफिस के काम का भारी तनाव किसी भी इंसान को अंदर से तोड़ देता है। ऐसे में जब वीकेंड पर थोड़ा सा फुर्सत का वक्त मिलता है, तो इंसान उसे दोस्तों के साथ पार्टी करने की बजाय खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से रीचार्ज करने में खर्च करना बेहतर समझता है। ऊर्जा और समय की इस कमी के कारण न तो नए रिश्ते बन पाते हैं और न ही पुराने रिश्तों को संवारने की ताकत बचती है।
जिंदगी हमें हर दिन नए तजुर्बे देती है, और कई बार ये अनुभव बेहद कड़वे होते हैं। इसी उम्र के आसपास लोग अपने कई करीबी दोस्तों को हमेशा के लिए खो देते हैं। कई लोगों के दोस्ती के मामले में इतने बुरे और दर्दनाक अनुभव होते हैं कि उनका इस पवित्र रिश्ते से ही भरोसा उठ जाता है। यही वजह है कि वे जिंदगी के इस मोड़ पर 'फ्रेंडशिप ब्रेकअप' का सामना करते हैं और दोबारा किसी पर आसानी से भरोसा नहीं कर पाते।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इंसान का दायरा और चीजों को देखने का नजरिया भी परिपक्व यानी मैच्योर हो जाता है। इस बढ़ती मैच्योरिटी के साथ व्यक्ति को अकेले रहने की कला भी आ जाती है। हालांकि तन्हाई का यह हुनर हर किसी के पास नहीं होता, लेकिन जिन लोगों में यह विकसित हो जाता है, वे फिर बाहरी दुनिया की भीड़भाड़ से दूर अपने ही अकेलेपन में सुकून तलाशने लगते हैं। दोस्ती अब उनके लिए पहली प्राथमिकता नहीं रह जाती, बल्कि वे खुद के साथ जीना सीख जाते हैं।
Location : New Delhi
Published : 30 July 2026, 3:43 PM IST