नारी शक्ति को सलाम: जब सबने छोड़ा साथ, तब ‘ममता’ बनी उम्मीद; अदम्य साहस से समाज को दिखाई नई दिशा

एक ऐसा काम, जिससे लोग डरते हैं… जब सब पीछे हट गए, तब एक महिला ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाल ली। चतरा की यह कहानी सिर्फ हिम्मत नहीं, बल्कि सोच बदलने की शुरुआत भी है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 22 April 2026, 10:11 AM IST

Chatra: पोस्टमार्टम हाउस का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर और झिझक पैदा हो जाती है। यह एक ऐसा काम माना जाता रहा है जिसे पुरुष प्रधान समाज का हिस्सा समझा जाता था। लेकिन चतरा से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि 'नारी शक्ति' की अदम्य साहस की कहानी भी कहती है। जहां अस्पताल के अनुभवी कर्मी अवैध वसूली के आरोपों के बाद काम छोड़कर फरार हो गए, वहीं एक महिला ममता देवी ने इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाकर समाज को एक नई दिशा दिखाई है।

कहां से शुरू हुई पूरी कहानी?

मामला तब सामने आया जब भोज्या गांव में एक मां और उसकी दो बच्चियों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम कर्मियों ने उनसे 5000 रुपये की अवैध वसूली की मांग की। जैसे ही मामला बढ़ा कार्रवाई के डर से सभी कर्मचारी काम छोड़कर फरार हो गए। इसका असर सीधे उन परिवारों पर पड़ा, जो अपने प्रियजनों के अंतिम प्रक्रियाओं के लिए अस्पताल पहुंचे थे। सुबह से दोपहर के 12 बज गए लेकिन कोई भी शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं था।

घंटों इंतजार, लेकिन कोई नहीं आया आगे

इसी बीच एक और मामला सामने आया, जहां रोजगार सेवक राजेश शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने अस्पताल पहुंचे। सुबह से लेकर दोपहर तक परिवार के लोग भटकते रहे, लेकिन कोई भी कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं था। मजबूरी में परिजनों को इधर-उधर मदद के लिए दौड़ना पड़ा।

बंगाल चुनाव में नया सिस्टम लागू, जानिए कैसे मिलेगी आपको तुरंत मदद

जब यह मामला सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह के पास पहुंचा, तो उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने एक साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने ममता देवी को जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया। यह चतरा के इतिहास में पहली बार है जब एक महिला ने इस कठिन और संवेदनशील कार्य को अपनी स्वेच्छा से अपनाया।

ममता देवी की मानें तो, लोग कहते हैं कि महिलाएं कमजोर होती हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर हम घर संभाल सकते हैं, तो पीड़ितों की सेवा क्यों नहीं कर सकते? मुझे इस काम को करने में कोई डर नहीं लगता, बल्कि खुशी है कि मैं मुश्किल वक्त में लोगों के काम आ पा रही हूं। मैं इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह उत्साहित हूं।

अस्पताल प्रबंधन ने की सराहना

अस्पताल के अधिकारियों ने ममता के इस कदम को बड़ी उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि यह न केवल एक साहसिक पहल है, बल्कि उन लोगों के लिए भी संदेश है जो भ्रष्टाचार के जरिए लोगों को परेशान करते हैं। अब ममता देवी को आधिकारिक रूप से इस काम के लिए नियुक्त किया गया है।

Char Dham Yatra 2026: केदारनाथ धाम “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंजा, जानिए श्रद्धालु कैसे अपने को महसूस कर रहे धन्य

बदलती सोच का संकेत

पुराने कर्मी अवैध वसूली के चक्कर में काम छोड़ चुके हैं, लेकिन अब ममता कुमारी को सिविल सर्जन के निर्देश पर रखा गया है। स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने ममता के साहस की सराहना की है। उनका मानना है कि यह कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेगा और महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।

चतरा की यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि बदलते समाज की झलक है। यह दिखाती है कि अब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, चाहे वह कितना भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।

Location :  Chatra

Published :  22 April 2026, 10:11 AM IST