
ट्रंप की मजबूरी बनी ईरान से डील (Img- Pinterest)
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष में अब कूटनीतिक मोड़ आता दिख रहा है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी तरह ईरान के साथ एक समझौता (डील) करने के लिए बेताब हैं। इस बेताबी की सबसे बड़ी वजह जंग पर हो रहा अंधाधुंध खर्च है।
फाइटर जेट्स, आधुनिक मिसाइलों और गोला-बारूद की भारी खपत ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता असफल होने के बाद अब वाशिंगटन की कोशिश है कि किसी भी तरह युद्ध के इस खर्चीले चक्रव्यूह से बाहर निकला जाए।
सीधी बातचीत बंद होने के बावजूद परदे के पीछे कूटनीति तेज हो गई है। कतर के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित अस्थायी समझौते (ड्राफ्ट) पर चर्चा काफी आगे बढ़ चुकी है।
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इस मध्यस्थता प्रक्रिया में ओमान भी अहम भूमिका निभा रहा है। ईरान का मकसद तीन महीने की एक अल्पकालिक व्यवस्था (Short-term arrangement) कायम करना है, ताकि क्षेत्र में जारी हिंसा पर तुरंत रोक लग सके। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि वे बातचीत के लिए किसी तय समय सीमा के दबाव में काम नहीं कर रहे हैं।
शांति वार्ता के प्रयासों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रेजाई ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनके जहाजों की नाकेबंदी बंद नहीं की गई, तो तेहरान खामोश नहीं बैठेगा।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनका रास्ता रोका गया तो वे अमेरिकी समुद्री जहाजों को सीधा निशाना बनाएंगे। अब देखना यह होगा कि कतर और ओमान द्वारा तैयार यह ड्राफ्ट हॉर्मुज में मंडराते युद्ध के बादलों को छांट पाता है या नहीं।
Location : Washington
Published : 5 August 2026, 12:03 PM IST