
लंदन की सड़कों पर गूंजा विद्रोह!
New Delhi: पीओके यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई, नागरिकों पर हिंसा और राजनीतिक दमन के आरोपों के बीच अब मामला अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया है। इसी कड़ी में ब्रिटेन की राजधानी लंदन में रविवार को हजारों ब्रिटिश कश्मीरियों ने सड़कों पर उतरकर ऐसा विरोध प्रदर्शन किया जिसने पाकिस्तान सरकार और उसकी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
London की सड़कों पर रविवार को माहौल पूरी तरह गर्म रहा। प्रदर्शनकारी पहले Parliament Square में एकत्र हुए और फिर वहां से Trafalgar Square तक विशाल मार्च निकाला। इस दौरान हजारों की भीड़ ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग यही थी कि Pakistan अधिकृत कश्मीर (PoK) में सेना की कथित दखलअंदाजी और अत्याचारों को तुरंत रोका जाए। भीड़ ने खुलकर “पाकिस्तानी सेना वापस जाओ” जैसे नारे लगाए, जिससे पूरा इलाका गूंज उठा।
इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का खुलकर समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि JAAC आम जनता की आवाज उठा रही है, लेकिन सरकार उसे दबाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने JAAC पर सख्त कार्रवाई करते हुए उसे आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया है, जिस पर मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। Human Rights Commission of Pakistan ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
पिछले कुछ समय से PoK के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। खासकर रावलाकोट में पुलिस और JAAC कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों ने हालात और बिगाड़ दिए। इस झड़प में कई नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कई जगह बाजार बंद रहे और सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ। दुकानों के शटर गिर गए और सड़कें लगभग खाली दिखीं, जबकि सुरक्षा बलों की भारी तैनाती रही।
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JAAC लंबे समय से पीओके में आटे और बिजली पर सब्सिडी की मांग कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार कोई राहत नहीं दे रही। इसके साथ ही एक बड़ा मुद्दा यह भी है कि पीओके की विधानसभा में मौजूद 12 “शरणार्थी सीटों” को खत्म करने की मांग भी उठ रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये सीटें 1947 के बाद पाकिस्तान में गए शरणार्थियों के लिए हैं, लेकिन अब इन्हें राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
पीओके में पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी लंबे समय से विवाद का विषय रही है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि सेना नागरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है और विरोध करने वालों पर सख्ती की जा रही है।
इस पूरे मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। भारत का लगातार कहना है कि Jammu and Kashmir और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। लंदन में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर ला दिया है, जहां मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक दमन जैसे सवाल तेजी से उठ रहे हैं।
Location : New Delhi
Published : 15 June 2026, 2:56 PM IST
Topics : human rights Kashmir Issue London protest Pakistan PoK