Nepal Floods 2026: ट्रंप के एक फैसले ने बढ़ाई नेपाल की लाचारी, 2015 जैसा मददगार अमेरिका आज आपदा में बना मूकदर्शक

नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई सदी की सबसे भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। जहां अमेरिका और जापान जैसे देश मदद से हाथ खींच रहे हैं, वहीं भारत संकटमोचक बनकर डटा है। जानिए कैसे एक राजनीतिक फैसले ने हजारों जिंदगियों को लाचार बना दिया।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 10 September 2026, 7:49 AM IST

Kathmandu: नेपाल में अगस्त के अंतिम सप्ताह में ग्लेशियर फटने से आई सदी की सबसे भीषण बाढ़ और भीषण भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। त्रासदी के दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी चारों तरफ चीख-पुकार और लाचारी का मंजर है।

नेपाल और तिब्बत को मिलाकर अब तक 1,300 से अधिक बेकसूर लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि करीब 5,000 लोग जिंदगी और मौत के बीच अब भी लापता हैं। लेकिन इस भयानक मानवीय त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जब नेपाल को सबसे ज्यादा अपनों की जरूरत थी, तब दुनिया के कई बड़े देश मदद देने में आनाकानी कर रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का एक पुराना फैसला और आज का खौफनाक असर

इस पूरी लाचारी के पीछे एक ऐसा कारण है जिसने राहत कार्यों की कमर तोड़कर रख दी है। ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले वर्ष यूएसएआईडी (USAID) को बंद करने के फैसले का सीधा असर आज नेपाल की धरती पर साफ दिख रहा है। बीते सालों तक जो अमेरिकी सहायता एजेंसियां और एनजीओ किसी भी आपदा के आते ही जमीन पर राशन, दवाएं और बचाव दल लेकर उतर जाते थे, वे आज पूरी तरह गायब हैं।

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फंड बंद होने के कारण स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कई बड़े एनजीओ पहले ही ताला लगा चुके थे। नतीजा यह हुआ कि जब ग्लेशियर टूटा और लोग मलबे में दब गए, तब तुरंत मदद पहुंचाने के लिए कोई बड़ा तंत्र मौजूद ही नहीं था।

2015 की दरियादिली बनाम 2026 की बेरुखी: बदलावा का कड़वा सच

अगर तुलना करें, तो यह बदलाव बेहद चौंकाने वाला है। साल 2015 में जब नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था, तब महज 48 घंटे के भीतर अमेरिका ने अपने 128 विशेषज्ञ आपदा कर्मियों की टीम उतार दी थी और तुरंत 1 करोड़ डॉलर की भारी मदद दी थी।

लेकिन 2026 की इस त्रासदी में इतनी बड़ी तबाही के बावजूद अमेरिका ने सिर्फ 10,000 परिवारों के खाने के लिए 36 लाख डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) की बेहद मामूली रकम दी है। ऐसा ही कुछ हाल जापान का भी है, जिसने 2015 में तुरंत 80 लाख डॉलर दिए थे, लेकिन इस बार सिर्फ 30 लाख डॉलर की मदद का ही वादा किया है।

जब अपनों ने छोड़ा हाथ, तब पड़ोसी भारत बना सबसे बड़ा सहारा

जहां दुनिया के बड़े और अमीर देश बजट और अपनी नीतियों का हवाला देकर पीछे हट रहे हैं, वहीं भारत ने एक सच्चे पड़ोसी का धर्म निभाया है। संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के लिए सब कुछ न्योछावर करने को तैयार दिखा।

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भारतीय वायुसेना का विशाल सी-17 ग्लोबमास्टर विमान हाल ही में 35 टन राहत सामग्री और विशेष उपकरण लेकर नेपाल पहुंचा। यह भारत की तरफ से भेजी गई 7वीं बड़ी खेप है। भारत लगातार जरूरी दवाएं, अस्थायी तंबू, और खाने-पीने का सामान भेजकर नेपाल की सांसों को थामने की हरसंभव कोशिश कर रहा है।

Location :  Kathmandu

Published :  10 September 2026, 7:49 AM IST