BRICS Summit 2026 से घबराया अमेरिका? जानिए अमेरिकी अखबारों में भारत-चीन संबंधों को लेकर क्या छपा बड़ा दावा

नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर अमेरिकी मीडिया में खासी चर्चा है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' समेत प्रमुख अखबारों ने इसे बदलते वैश्विक समीकरणों, भारत-चीन संबंधों और वाशिंगटन-बीजिंग की प्रतिस्पर्धा के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ करार दिया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 September 2026, 11:50 AM IST

New Delhi: दुनिया की नजरें राजधानी दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स समिट 2026 (BRICS Summit 2026) पर टिकी हैं। अमेरिकी मीडिया इस समिट को बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक अहम कूटनीतिक मंच के तौर पर देख रहा है। खासकर अमेरिकी अखबारों में भारत और चीन के बीच रिश्तों में संभावित सुधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

अमेरिकी मीडिया का मानना ​​है कि ब्रिक्स समिट ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया क्षेत्रीय संघर्षों, आर्थिक दबावों, ऊर्जा संकट और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत-चीन के प्रभाव पर सवाल उठाए

ब्रिक्स समिट पर अपनी रिपोर्ट में, अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि बैठक से जो मुख्य सवाल उभर रहा है, वह यह है कि विकासशील देशों की आवाज के तौर पर कौन सा देश भारत या चीन अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा।

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रिपोर्ट के अनुसार, चीन ब्रिक्स को अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर देखता है। इसके विपरीत भारत चाहता है कि ब्रिक्स एक खुला और संतुलित संगठन बना रहे जहां सदस्य देशों को किसी एक पावर ब्लॉक (शक्ति समूह) के साथ जुड़ने के लिए मजबूर न किया जाए।

अमेरिका-चीन तनाव के बीच ब्रिक्स का महत्व बढ़ा

अमेरिकी मीडिया ने गौर किया कि मौजूदा मुद्दे जैसे युद्ध, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अमेरिका की टैरिफ नीतियां और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकें कई देशों को अपनी विदेश नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। चीन मामलों की जानकार युन सन का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग लंबे समय से अमेरिका के साथ भारत के गहरे होते रणनीतिक संबंधों को लेकर चिंतित रहा है। नतीजतन चीन भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के किसी भी मौके को नजरअंदाज नहीं करना चाहेगा।

सात साल बाद भारत आ रहे हैं शी जिनपिंग

ब्रिक्स समिट की एक बड़ी राजनीतिक घटना चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा है; वे लगभग सात साल के अंतराल के बाद देश आ रहे हैं। यह दौरा 2020 में पूर्वी लद्दाख में हिंसक सीमा झड़प के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनावपूर्ण संबंधों के बाद हो रहा है। हालांकि, 2024 से ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और संबंधों को धीरे-धीरे बेहतर बनाने की कोशिशें चल रही हैं।

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शी जिनपिंग और ट्रंप की मुलाकात पर भी नजर

अमेरिकी मीडिया ने यह भी रिपोर्ट किया है कि भारत दौरे के बाद शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात का प्रस्ताव है। इस संदर्भ में, वैश्विक कूटनीति के लिहाज़ से दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स समिट का महत्व और बढ़ गया है। जानकारों का मानना ​​है कि भारत इस मंच के जरिए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और 'ग्लोबल साउथ' का नेतृत्व करने में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश करेगा जबकि चीन ब्रिक्स (BRICS) के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  12 September 2026, 11:49 AM IST