फांसी के फंदे तक पहुंचा दहेज का दरिंदा, 8 साल के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार बेटी की आत्मा को मिला सुकून

मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आठ साल पुराने दहेज हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति नदीम को मृत्युदंड और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 September 2026, 4:10 PM IST

Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने दहेज के कारण हुई मौत के लगभग आठ साल पुराने मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पति नदीम को अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या करने का दोषी पाया और उसे मौत की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

ADJ/FTC कोर्ट नंबर 3 के जज रवि कुमार दिवाकर ने यह फैसला सुनाया और आरोपी को हत्या व उससे जुड़े आरोपों में दोषी पाया। पुलिस के मुताबिक, यह सजा प्रभावी जांच और अभियोजन पक्ष की मजबूत दलीलों की वजह से मिल सकी।

केरोसिन डालकर जलाने के आरोप

यह घटना शाहपुर पुलिस स्टेशन के इलाके में हुई थी। पुलिस के अनुसार, बागपत जिले के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने 23 जुलाई 2018 को शाहपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटी को उसका पति नदीम (शाहपुर निवासी सलीम का बेटा) दहेज की मांग को लेकर लगातार परेशान करता था। आरोप था कि उसके साथ मारपीट की गई और केरोसिन डालकर उसे आग के हवाले कर दिया गया। बुरी तरह झुलसी महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई।

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पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की

पीड़िता के परिवार की शिकायत के आधार पर शाहपुर पुलिस स्टेशन में एक केस (क्राइम नंबर 360/2018) दर्ज किया गया। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 498A, 304B, 302 और 504 के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने 26 अगस्त 2018 को आरोपी नदीम को गिरफ्तार किया और उसे कोर्ट में पेश किया। जांच पूरी होने के बाद 23 नवंबर 2018 को उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी अभियोजन

मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, इस मामले की पैरवी 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत जोर-शोर से की गई यह गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों को सजा दिलाने के लिए शुरू की गई एक पहल है। पुलिस ने गवाहों को समय पर कोर्ट में पेश करना सुनिश्चित किया और अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ मजबूत सबूत पेश किए। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से ADGC कुलदीप कुमार और कोर्ट पैरोकार कॉन्स्टेबल सुमित झा पेश हुए।

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जज ने 11 मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई

फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने पहले भी गंभीर अपराधों और हत्या से जुड़े मामलों में कई कड़े फैसले सुनाए हैं। अब तक, उन्होंने 11 मामलों में 23 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है।

अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश

कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस अधिकारियों ने इसे न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया। अधिकारियों ने कहा कि मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन के जरिए गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  7 September 2026, 4:10 PM IST