बांदा हादसे ने रुलाया: तेज बहाव में समा गई तीन जिंदगियां, एक साथ उठीं अर्थियां

बांदा में सोमवती अमावस्या पर नदी में स्नान करने गए तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया। तेज बहाव में भाई-बहन और उनका भांजा बह गए। जब शव मिले तो भाई और भांजा अपनी बहन के पैर पकड़े हुए थे, यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 June 2026, 8:59 AM IST

Banda: बांदा जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया है। सोमवती अमावस्या के मौके पर मंदिर दर्शन और नदी में स्नान करने गए तीन मासूम बच्चे देखते ही देखते मौत के मुंह में समा गए। चंद्रावल नदी के तेज बहाव में भाई-बहन और उनका भांजा बह गए। तीन घंटे तक गोताखोर नदी में जिंदगी की तलाश करते रहे, लेकिन जब बच्चों को बाहर निकाला गया तो हर किसी की आंखें भर आईं। सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया जब भाई और भांजा अपनी बहन के पैर पकड़े हुए मिले। ऐसा लग रहा था जैसे आखिरी समय तक तीनों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की होगी।

स्नान करने गए थे मंदिर

पूरा मामला जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव का है। गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा के मुताबिक उनकी भतीजी माधुरी (13), भाई अंश कुमार (10) और भांजा प्रतीक (10) अपनी बड़ी मां हीरामणि के साथ सिद्धबाबा मंदिर में पूजा और दर्शन के लिए गए थे। मंदिर दर्शन के बाद तीनों बच्चे चंद्रावल नदी में स्नान करने लगे। इसी दौरान नदी का बहाव काफी तेज था। अचानक अंश का पैर गीली मिट्टी में फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया।

मौदहा बांध से छोड़ा गया था पानी

परिवार के लोगों के मुताबिक हाल ही में मौदहा बांध का पानी नहरों के लिए छोड़ा गया था। नहरों से होकर यही पानी चंद्रावल नदी में पहुंच रहा था, जिससे नदी का बहाव सामान्य से काफी तेज हो गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि नदी की स्थिति खतरनाक थी, लेकिन बच्चे अचानक हादसे का शिकार हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के आगे किसी की कोशिश सफल नहीं हो सकी।

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तीन घंटे की तलाश के बाद मिले शव

घटना की सूचना मिलते ही गांव के गोताखोर मौके पर पहुंचे। नदी में बहाव इतना तेज था कि बच्चों को ढूंढने में 10 से 12 गोताखोरों को तीन घंटे से ज्यादा समय लग गया। कड़ी मशक्कत के बाद तीनों बच्चों के शव घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर बरामद किए गए। जब शव बाहर निकाले गए तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। भाई और भांजा अपनी बहन के पैर पकड़े हुए थे। इस दृश्य ने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

गोताखोरों द्वारा बच्चों को बाहर निकालने के बाद दो एंबुलेंस की मदद से तीनों को जसपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां अपने बच्चों के शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। उनकी चीखें सुनकर अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू निकल आए।

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तीन अर्थियां एक साथ उठीं

गौरीकला गांव में एक साथ तीन बच्चों की मौत से मातम छा गया। पिता रमाशंकर विश्वकर्मा का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक प्रतीक की मां स्नेहा भी बेटे का शव देखकर बेसुध हो गईं। किसी ने नहीं सोचा था कि जिस बच्चे को गोद में खिलाया, उसी की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। पोस्टमार्टम के बाद जब गांव से तीन अर्थियां एक साथ निकलीं तो पूरा गांव गमगीन हो गया। बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दर्दनाक दृश्य बहुत कम देखा है।

प्रशासन ने की सावधानी बरतने की अपील

मामले पर सीओ सदर सौरभ सिंह ने बताया कि तीनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस समय नदी और नालों के आसपास बच्चों को अकेले न जाने दें, क्योंकि बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण बहाव तेज रहता है। फिलहाल इस हादसे ने पूरे इलाके को गहरे दुख में डाल दिया है। एक छोटी सी लापरवाही ने तीन परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

Location :  Banda

Published :  16 June 2026, 8:59 AM IST