क्या एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर छुपाने में काम आएगा ‘निजता का अधिकार’? Supreme Court ने साफ कर दिया सच

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि तलाक के मामलों में पत्नी एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर के आरोप साबित करने के लिए CDR और होटल रिकॉर्ड अदालत की मदद से मंगवा सकती है। निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 4 July 2026, 7:19 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि यदि पत्नी अपने पति पर विवाह-बाह्य संबंध (Extra-Marital Affair) का आरोप लगाती है, तो वह आरोपों को साबित करने के लिए अदालत की सहायता से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), होटल बुकिंग और भुगतान से जुड़े दस्तावेज जैसे साक्ष्य मंगवा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पति केवल निजता के अधिकार (Right to Privacy) का हवाला देकर जांच से नहीं बच सकता।

Supreme Court ने खारिज की पति की अपील

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के 10 मई 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली पति की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

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हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत व्यभिचार (Adultery) तलाक का वैध आधार है। इसलिए यदि पत्नी आरोपों को साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगती है, तो केवल निजता के अधिकार का हवाला देकर उन्हें रोका नहीं जा सकता।

निजता का अधिकार पूर्ण नहीं

अदालत ने स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार संविधान के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है, लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। कानून और जनहित के तहत इस पर उचित एवं वैधानिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

फैमिली कोर्ट्स एक्ट की धारा 14 का हवाला

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट्स एक्ट की धारा 14 का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार न्यायालय ऐसे दस्तावेज, रिपोर्ट या अन्य सामग्री को भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर सकता है, जो विवाद के प्रभावी समाधान में सहायक हो, भले ही वे सामान्य परिस्थितियों में भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत स्वीकार्य न हों।

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होटल रिकॉर्ड और CDR क्यों अहम?

अदालत के अनुसार, होटल बुकिंग, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और पहचान पत्र से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित व्यक्ति किसी अन्य महिला के साथ होटल में ठहरा था या नहीं। वहीं, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से दोनों के बीच बातचीत की आवृत्ति और अवधि का आकलन किया जा सकता है, जो मामले में प्रासंगिक साक्ष्य हो सकते हैं।

क्या था पूरा मामला?

पत्नी ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसके पति का दूसरी महिला से विवाह-बाह्य संबंध (Extra-Marital Affair) है और उस संबंध से एक बेटी भी है। पत्नी ने दावा किया कि दोनों एक होटल में साथ ठहरे थे। इन आरोपों को साबित करने के लिए उसने अदालत से होटल रिकॉर्ड और CDR मंगाने की मांग की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने स्वीकार किया था। इसी आदेश को पति ने हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

Location :  New Delhi

Published :  4 July 2026, 7:19 PM IST

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