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दिल्ली दंगा मामले के आरोपी शरजील इमाम को अदालत से 10 दिनों की अंतरिम जमानत मिली है। वह 6 साल बाद तिहाड़ जेल से बाहर आए हैं। यह राहत उन्हें अपने भाई की शादी में शामिल होने और बीमार मां की देखभाल के लिए दी गई है।
शरजील इमाम दो दस दिन के लिए मिली राहत (Img: Google)
New Delhi: वर्ष 2020 के चर्चित दिल्ली दंगा मामले से जुड़े आरोपी शरजील इमाम को आखिरकार लंबा इंतजार खत्म होने के बाद 10 दिनों के लिए अंतरिम जमानत मिल गई है। शुक्रवार, 20 मार्च को वह तिहाड़ जेल से बाहर आया। अदालत ने 9 मार्च को यह राहत देते हुए उन्हें पारिवारिक कारणों के चलते सीमित अवधि के लिए रिहा करने का आदेश दिया था।
बताया गया है कि शरजील को यह जमानत अपने भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल के उद्देश्य से दी गई है। अदालत ने इसके साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं, जिनका पालन करना उनके लिए अनिवार्य होगा।
जानकारी के अनुसार, तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद शरजील इमाम के परिवार में खुशी का माहौल देखने को मिला। शरजील के भाई ने कहा कि यह पल उनके परिवार के लिए बेहद भावुक है, क्योंकि वर्षों बाद शरजील अपनी मां से मिल पाएंगे। उन्होंने अदालत का आभार जताते हुए कहा कि परिवार में पिता के न होने के कारण शरजील ही एक तरह से अभिभावक की भूमिका निभाते हैं।
परिवार का कहना है कि वे अदालत द्वारा तय सभी नियमों का पालन करेंगे और निर्धारित समय के भीतर अपने सभी पारिवारिक कार्यक्रम पूरे कर लेंगे।
शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि शरजील इमाम ने फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों में साजिश रचने में भूमिका निभाई थी।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में दिल्ली में भड़की हिंसा ने पूरे देश को झकझोर दिया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हालात बिगड़ गए थे, जिसके चलते कई इलाकों में हिंसा फैल गई।
इस दंगे में कई लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। यह मामला आज भी न्यायिक प्रक्रिया में है और कई आरोपी अब भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
शरजील इमाम ने इससे पहले भी जमानत के लिए कई बार अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली थी। इस बार अदालत ने मानवीय आधार पर उन्हें सीमित अवधि के लिए जमानत प्रदान की है।