महर्षि आश्रम घोटाले में नेताओं के खिलाफ रिपोर्ट तैयार, विरोधियों ने हाईकमान को सौंपी फाइल, वेस्ट यूपी में मचा हड़कंप

नोएडा के चर्चित महर्षि आश्रम घोटाले में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान सामने आया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और जमीन सौदों के जरिए करोड़ों रुपये का खेल हुआ, जिसकी रिपोर्ट अब हाईकमान और जांच एजेंसियों तक पहुंच चुकी है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 9 June 2026, 10:00 AM IST

Noida Desk: नोएडा के चर्चित महर्षि आश्रम घोटाले के तार अब गौतमबुद्ध नगर तक सिमित नहीं है। मामला वेस्ट उत्तर प्रदेश तक जुड़ गया है। इस मामले में नेताओं के विरोधियों ने रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में लिखा है कि किस तरीके से घोटाला हुआ और कितने करोड़ रुपये का नेताओं को मुनाफा हुआ।

20 हजार से ज्यादा फ्लैटों पर संकट

महर्षि आश्रम की जमीन पर 20 हजार से ज्यादा अवैध फ्लैट बने हुए हैं। इस मामले में कुछ खुफिया रिपोर्ट नेताओं के विरोधियों ने ईडी और हाईकमान तक पहुंचा दी। इसमें ऐसी फाइलें भी शामिल हैं, जिनकी वजह से नेताओं पर बड़ा संकट आ सकता है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन बेचने का आरोप

जांच एजेंसियों को पता चला है कि नोएडा के भंगेल, सलारपुर, गेझा तिलपताबाद और हाजीपुर गांवों में स्थित महर्षि आश्रम की जमीनों को फर्जी संस्था बनाकर और नकली दस्तावेज तैयार कर बेचे गए। जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर फर्जी प्राधिकरण पत्र, नकली बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली मुहरों का इस्तेमाल कर ट्रस्ट की संपत्तियों का सौदा किया गया। आरोप है कि इन जमीनों पर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कर हजारों फ्लैट तैयार किए गए और उनकी बिक्री भी जारी रही।

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नेताओं और करीबियों की भूमिका पर सवाल

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां केवल जमीन सौदों की ही नहीं, बल्कि उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं, जिनका इस पूरे नेटवर्क से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध रहा है। आरोप है कि कुछ राजनीतिक दलों के सक्रिय नेताओं और उनके करीबियों ने जमीन खरीद-फरोख्त तथा अवैध निर्माण को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई। हालांकि अभी तक किसी नेता के खिलाफ जांच एजेंसियों की ओर से औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं, लेकिन राजनीतिक स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

33 करोड़ की जमीन 16 करोड़ में बेचने का आरोप

वैसे तो पूरा घोटाला करीब 200 करोड़ रुपये का है, लेकिन मामले का सबसे चर्चित पहलू दिसंबर 2025 का एक जमीन सौदा है। आरोप है कि गेझा तिलपताबाद गांव की 3.3610 हेक्टेयर जमीन, जिसकी सर्किल रेट करीब 33.61 करोड़ रुपये थी, उसे मात्र 16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। शिकायत के बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा, जिसके निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया और निर्धारित समय में रिपोर्ट मांगी गई। साथ ही ईडी को भी वित्तीय पहलुओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया।

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अधिकारियों की भूमिका भी जांच में

ईडी इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा निबंधन विभाग से जुड़े रिकॉर्ड तलब किए गए हैं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर जमीनों की खरीद-फरोख्त और निर्माण गतिविधियां बिना प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के संभव नहीं हो सकती थी।

Location :  Noida

Published :  9 June 2026, 10:00 AM IST