बड़ी खबर: आधा दर्जन मुकदमे, कई संगीन धाराएं… आखिर कौन है मनोज तिवारी? DFO जैसे बड़े सरकारी अधिकारियों ने दर्ज कराई हैं FIR

चार दिन से महराजगंज जिले में चर्चा का विषय बने मनोज तिवारी की क्राइम हिस्ट्री खंगालने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। डाइनामाइट न्यूज़ की पड़ताल में पता चला कि उसके खिलाफ कई संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी और तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) भी वादी हैं। कई मामलों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जबकि मुकदमें न्यायालय में लंबित हैं।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 25 July 2026, 1:27 PM IST

महराजगंज: पिछले चार दिनों से चर्चा में आए मनोज तिवारी पुत्र लाल बहादुर तिवारी, निवासी ग्राम सिंहपुर, पोस्ट औराटार, थाना निचलौल की आपराधिक पृष्ठभूमि की पड़ताल में उसके खिलाफ कई गंभीर मुकदमे सामने आए हैं। डाइनामाइट न्यूज़ के पास उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उसके खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस न्यायालय में आरोपपत्र (चार्जशीट) भी दाखिल कर चुकी है।

दर्ज प्रमुख मुकदमे

1. मुकदमा अपराध संख्या 335/2023 (कोतवाली सदर)
धाराएं: 120-B, 500, 506, 384, 353 IPC
वादी: तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) पुष्प कुमार (IFS)
आरोप: सरकारी कार्य में बाधा डालने, कथित अवैध वसूली और धमकी देने से संबंधित।

2. मुकदमा अपराध संख्या 369/2021 (कोतवाली सदर)
धाराएं: 352, 504, 353 IPC
वादी: शिवेंद्र जौहरी, प्रभारी, शिविर शाखा, सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग
आरोप: सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट एवं अन्य आरोप।

3. मुकदमा अपराध संख्या 437/2021 (निचलौल)
धाराएं: 323, 504, 506 IPC
वादी: नवीन उपाध्याय
आरोप: मारपीट और जान से मारने की धमकी।

4. मुकदमा अपराध संख्या 220/2020 (निचलौल)
धाराएं: 188, 269, 270, 323, 504, 506 IPC एवं महामारी अधिनियम
वादी: मोहन सिंह
आरोप: मारपीट तथा महामारी संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला।

DFO पुष्प कुमार (IFS) द्वारा मनोज तिवारी के खिलाफ दर्ज कराया गया मामला (फोटो - डाइनामाइट न्यूज़)

चार्जशीट दाखिल

डाइनामाइट न्यूज़ को उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार इन मामलों में पुलिस आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है, लेकिन सभी मामले अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं।

तीन और मामलों की भी चर्चा

डाइनामाइट न्यूज़ की पड़ताल में यह भी जानकारी सामने आई है कि मनोज तिवारी के खिलाफ तीन अन्य FIR भी दर्ज हुई थीं, जिनमें पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट (FR) लगाए जाने की बात सामने आई है। इन मामलों की दोबारा विवेचना की मांग स्थानीय स्तर पर उठ रही है।

सबसे बड़ा सवाल

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि जिन मामलों में शिकायतकर्ता स्वयं वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और वन विभाग के अधिकारी रहे हैं, वे भी वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सरकारी अधिकारियों द्वारा दर्ज कराए गए मामलों में भी अंतिम परिणाम अब तक नहीं निकल पाया, तो कानून-व्यवस्था और अभियोजन प्रणाली की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न क्या नहीं लगना चाहिये?

Location :  Maharajganj

Published :  25 July 2026, 12:49 PM IST