गांव से पकड़कर थाने लाए थे मोहरपाल, पुलिस कस्टडी में हुई मौत… एटा में 20 साल बाद दरोगा-सिपाही को उम्रकैद

एटा के चर्चित 2005 मोहरपाल हत्याकांड में अदालत ने करीब 20 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन दरोगा गजराज सिंह और आरक्षी महावीर सिंह को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला आने के बाद दोनों दोषी पुलिसकर्मियों को जेल भेज दिया गया।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 12 August 2026, 4:12 PM IST

Etah: एटा में 20 साल पुराने मोहरपाल हत्याकांड में आखिरकार अदालत का बड़ा फैसला आ गया। वर्ष 2005 में गांव से पकड़कर थाना जैथरा लाए गए मोहरपाल की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। इस मामले में तत्कालीन पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगे थे। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने तत्कालीन दरोगा गजराज सिंह और आरक्षी महावीर सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

2005 में गांव से थाने लाया गया था मोहरपाल

पूरा मामला वर्ष 2005 का है। मोहरपाल को पुलिस गांव से पकड़कर थाना जैथरा लेकर आई थी। आरोप था कि थाने में पुलिस कस्टडी के दौरान उसके साथ मारपीट की गई। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। मोहरपाल की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद मामला गंभीर हो गया।

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पुलिस कस्टडी में मौत से मचा था हड़कंप

किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद मामला सीधे पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़ जाता है। मोहरपाल की मौत के मामले में भी यही हुआ। घटना के बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और मामला अदालत तक पहुंचा।

दरोगा और आरक्षी को हत्या का दोषी माना

अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन दरोगा गजराज सिंह और आरक्षी महावीर सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी माना। दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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मारपीट और साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी साबित

मामले में अदालत के सामने पुलिसकर्मियों पर मोहरपाल के साथ मारपीट करने के आरोप थे। इसके साथ ही घटना से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया था।

मुकदमे के दौरान दो आरोपियों की हो चुकी मौत

इस मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन थानाध्यक्ष मनीष यादव और सिपाही मिठाई लाल की मुकदमे की कार्यवाही के दौरान मौत हो चुकी है। इस वजह से उनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।

Location :  Etah

Published :  12 August 2026, 4:12 PM IST